उपचुनाव से पहले टीपू सुल्तान का मसला

कर्नाटक में अगले महीने 17 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। हालांकि अभी इन सीटों पर जीते विधायकों की अयोग्यता का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है पर चुनाव आयोग को लग रहा है कि पांच दिसंबर से पहले अदालत का फैसला आ जाएगा। अगर नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने तक अदालत का फैसला नहीं आता है तो चुनाव एक बार फिर टलेगा। पर उससे पहले ही चुनावी माहौल बनने लगा है, मुद्दे उठने लगे हैं और सभी पार्टियों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। विपक्षी पार्टियों- कांग्रेस और जेडीएस का गठबंधन टूट गया है और दोनों पार्टियां अलग अलग चुनाव लड़ने जा रही हैं। इसी बीच विधायकों की तोड़ फोड़ से जुड़ा एक ऑडियो टेप सामने आया है, जिसे लेकर राज्य की राजनीति गरमाई है।

इस बीच भाजपा ने अपना चुनावी एजेंडा जाहिर कर दिया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के चेहरे या सरकार के कामकाज और केंद्र सरकार के कामकाज की बजाय टीपू सुल्तान के भावनात्मक मुद्दे पर ही चुनाव लड़ेगी। चुनावों से ठीक पहले मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने ऐलान किया कि उनकी सरकार टीपू जयंती नहीं मनाएगी। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी ऐलान किया कि स्कूल, कॉलेजों की किताबों में से टीपू सुल्तान का संदर्भ हटाया जाएगा। यानी सरकार इतिहास की किताबें बदलेगी। ध्यान रहे भाजपा हमेशा टीपू सुल्तान को हिंदू विरोधी बता कर उनकी जयंती मनाने का विरोध करती रही है। चुनाव से पहले उसी विरोध को और तेज किया जाएगा।

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