कांग्रेस-जेडीएस क्या फिर साथ आएंगे?

महाराष्ट्र के बाद अब सबकी नजर कर्नाटक पर है। पांच दिसंबर को वहां 15 सीटों पर उपचुनाव हो रहा है। इसके नतीजे वहां की राजनीति को पूरी तरह से बदल सकते हैं। एक तरफ भाजपा दावा कर रही है कि वह सभी 15 सीटों पर जीतेगी तो दूसरी ओर कांग्रेस और जेडीएस ने दावा किया है कि वे एक भी सीट भाजपा को नहीं जीतने देंगे। कांग्रेस की ओर से वोक्कालिगा नेता और पार्टी के संकटमोचन डीके शिवकुमार ने इन सीटों पर कमान संभाली है। तो दूसरी ओर जेडीएस के नेता एचडी देवगौड़ा ने कहा है कि वे शिवकुमार का समर्थन करने को तैयार हैं। मई 2018 के चुनाव के बाद करीब सवा साल तक साथ मिल कर सरकार चलाने वाली कांग्रेस और जेडीएस एक बार फिर से साथ आने की तैयारी में दिख रहे हैं।

कहा जा रहा है कि अगर उपचुनाव के नतीजे वैसे नहीं हुए, जैसे भाजपा चाह रही है तो एक बार फिर कर्नाटक में राजनीतिक नाटक शुरू होगा। भाजपा को अपनी सरकार बचाने के लिए इन 15 सीटों में से कम से कम छह सीट जीतनी होगी। छह सीटें जीतने पर वह अपने 104 और दो निर्दलियों की मदद से बहुमत के 112 के आंकड़े तक पहुंचेगी। ध्यान रहे दो सीटें अब भी खाली हैं। अपने दम पर बहुमत के लिए भाजपा को कम से कम आठ सीटें जीतनी होंगी। अगर वह इससे कम जीतती है तो मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ भी आवाज उठेगी और कांग्रेस-जेडीएस मिल कर फिर सरकार बनाने की पहल करेंगे।

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