किसके साथ है देवगौड़ा की पार्टी

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा थाली के बैंगन की तरह हैं। वे और उनकी पार्टी कब किसके साथ होते हैं यह पता लगाना बहुत ही मुश्किल काम है। उनकी पार्टी ने कांग्रेस से तालमेल करके राज्य में सरकार बनाई। फिर सरकार गिर गई तो दोनों पार्टियां अलग हो गईं। उसके बाद भी कई बार खुद देवगौड़ा ने संकेत दिया कि वे फिर से कांग्रेस से तालमेल के लिए तैयार हैं। पर अब वे बयान दे रहे हैं कि भाजपा या मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा उनके दुश्मन नहीं हैं। असल में पिछले दिनों देवगौड़ा ने एक पुलिस अधिकारी के तबादले के लिए मुख्यमंत्री से कहा। मुख्यमंत्री ने उनके कहने से अधिकारी का तबादला कर दिया। उसके बाद देवगौड़ा का बयान आया कि मुख्यमंत्री येदियुरप्पा उनके दुश्मन नहीं हैं। उन्होंने यह कहावत भी दोहराई कि राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता है।

सो, अब सवाल है कि क्या भाजपा और जेडीएस एक दूसरे के करीब आ रहे हैं? ध्यान रहे कुछ दिन पहले कांग्रेस के नेता डीके शिवकुमार के खिलाफ सीबीआई और ईडी के जांच के मामले में जेडीएस ने उनका साथ दिया था। वे उसी वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं, जिसके सबसे बड़े नेता देवगौड़ा हैं। इसके बाद ही माना जा रहा था कि राज्य में होने वाले उपचुनावों में दोनों पार्टियां साथ मिल कर लड़ सकती हैं। देवगौड़ा पिता-पुत्र को इस बात का अंदेशा है कि इस बार शिवकुमार के खिलाफ हुई कार्रवाई की वजह से वोक्कालिगा पूरी तरह से कांग्रेस के साथ जा सकता है। पर अब ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस का साथ छोड़ कर जेडीएस ने भाजपा से तार जोड़ने का फैसला कर लिया है।

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