अजित पवार को क्लीन चिट किसने दिलाई?

यह यक्ष प्रश्न की तरह सवाल हो गया है कि एनसीपी के नेता अजित पवार को सिंचाई घोटाले में क्लीन चिट किसने दिलाई है? उनको क्लीन चिट देने वाला पहला हलफनामा जिस दिन हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में दायर किया गया उस दिन राज्य में देवेंद्र फड़नवीस कार्यवाहक मुख्यमंत्री थे। तभी खबर आई थी कि राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, एसीबी ने सिंचाई घोटाले से जुड़े नौ मामलों को बंद करने को कहा है। यह भी कहा गया था कि इन नौ मामलों में से एक भी मामला अजित पवार से जुड़ा नहीं है। एसीबी के प्रमुख ने कहा था कि तीन हजार एफआईआर हैं, जिनमें से ये नौ मामले ऐसे हैं, जिनमें अजित पवार का नाम नहीं है। सवाल है कि इन नौ की जगह 16 ऐसे मामलों की सूची कैसे अदालत में जमा हो गई, जिसमें पवार का नाम था? विदर्भ की सिंचाई परियोजनाओं से वे मंत्री के नाते और इस इलाके के कमेटी के चेयरमैन होने के नाते सीधे जुड़े थे। इनमें उनको क्लीन चिट मिली। उसके बाद इसी तरह का हलफनामा अमरावती से जुड़ी सिंचाई परियोजनाओं के मामले में दाखिल किया गया। दो मुख्य इलाकों में हुए कथित घोटालों से उनको बरी कर दिया गया।

अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस राज्य की शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। वे सरकार की आलोचना कर रहे हैं। पर यह प्रक्रिया तो उनकी सरकार के कार्यकाल में ही शुरू हुआ, जिसमें अजित पवार उप मुख्यमंत्री थे। तो क्या वे अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं? कई जानकार मान रहे हैं कि भाजपा सरकार ने प्रक्रिया शुरू की और उसके बाद राज्य के अधिकारियों ने एनसीपी को सत्ता में आता देख खुद ही आगे का काम कर दिया। पर यह मामला आसानी से खत्म होने वाला नहीं है।

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