एनसीपी, शिव सेना से कांग्रेस की दूरी

कांग्रेस को शरद पवार पर भरोसा नहीं हो रहा है। पवार के तमाम प्रयासों के बावजूद कांग्रेस में नेताओं के एक बड़ा समूह ऐसा है, जो मान रहा है कि अजित पवार ने जो किया है वह सारा खेल शरद पवार की सहमति से रचा गया है। कांग्रेस के नेता मान रहे हैं कि पवार ने जान बूझकर अपने भतीजे को विधायक दल का नेता चुना था और उन्हें मौका दिया कि वे भाजपा को समर्थन देकर उसकी सरकार बनवा दें। तभी तमाम कानूनी दांव-पेंचों के बावजूद कांग्रेस के ज्यादातर नेता मान रहे हैं कि अब महाराष्ट्र में भाजपा और एनसीपी की सरकार चलती रहेगी। थोड़े दिन तक शरद पवार शहीद बन कर घूमते रहेंगे कि भतीजे ने धोखा दिया और बाद में सब कुछ सामान्य हो जाएगा।

तभी कांग्रेस ने शिव सेना और एनसीपी दोनों से दूरी बनाई है। शनिवार से सोमवार तक कांग्रेस ने अपने सारे काम अकेले किए हैं। कांग्रेस के दो बड़े नेता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी सुप्रीम कोर्ट में जरूर पैरवी कर रहे थे पर वे पेशेवर हैसियत से कर रहे थे। शिव सेना और एनसीपी ने उनकी सेवाएं ली थीं। शनिवार और रविवार को दोनों दिन शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने साझा प्रेस कांफ्रेंस की पर उसमें कांग्रेस का कोई नेता शामिल नहीं हुए। कांग्रेस के नेता भी अपने विधायकों को लेकर होटल में बैठे रहे पर प्रदेश का भी कोई नेता शिव सेना, एनसीपी से मिलने नहीं गया। कांग्रेस नेताओं ने मुंबई की बजाय दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस की। कांग्रेस की यह प्रेस कांफ्रेंस भी अकेले हुई, जिसमें पृथ्वीराज चव्हाण शामिल हुए। कांग्रेस ने एक बार मुंह की खाने के बाद अब फूंक फूंक कर कदम बढ़ा रही है और कहीं भी शिव सेना व एनसीपी के साथ नहीं दिखना चाहती है।

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