महाराष्ट्र में क्या बन पाएगी सरकार?

महाराष्ट्र में किसी पार्टी की सरकार बनेगी या जम्मू कश्मीर वाली कहानी दोहराई जाएगी। जम्मू कश्मीर में कई महीने के राष्ट्रपति शासन के बाद जब तीन पार्टियों- पीपुल्स डेमोक्रेटिकट पार्टी, नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने एक साथ मिल कर सरकार बनाने का प्रयास किया तो राज्य की विधानसभा भंग कर दी गई।

उस समय राज्यपाल का कार्यालय जम्मू से काम कर रहा था और श्रीनगर में बैठे तीनों पार्टियों के नेता अपनी चिट्ठी जम्मू भेजते रहे पर राज्यपाल कार्यालय ने कह दिया कि उनकी फैक्स मशीन खराब है इसलिए चिट्ठी नहीं मिली।

सोचें, डिजिटल इंडिया के के मौजूदा समय में बाबा आदम के जमाने की एक मशीन ने कैसे लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत को नहीं पूरा होने दिया। बहरहाल, जम्मू कश्मीर की तरह महाराष्ट्र में भी कुछ भी हो सकता है।

जिस अंदाज में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी काम कर रहे हैं उसमें सरकार बनाने की मंशा तो कहीं नहीं दिख रही है। उसकी बजाय ऐसा लग रहा है, जैसे उन्होंने अपनी संवैधानिक बाध्यता को पूरा करने की औपचारिकता निभाई है। उन्होंने चुनाव नतीजे आने के लोकप्रिय सरकार बनाने पहल तब तक नहीं की, जब तक विधानसभा का कार्यकाल खत्म नहीं हो गया। उसमें भी उनको कायदे से दोनों चुनाव पूर्व गठंबधन के नेताओं को बुलाना चाहिए था

पर उन्होंने एक-एक पार्टियों को बुलाना शुरू किया। उसमें भी उनका धीरज एनसीपी तक पहुंचते-पहुंचते खत्म हो गया। उन्होंने चौथी सबसे बड़ी पार्टी और 98 सीटों वाले गठबंधन की सहयोगी कांग्रेस को बुलाया ही नहीं। उनके बुलावे पर भाजपा ने जरूर कहा कि वह सरकार नहीं बनाना चाहती है क्योंकि उसके पास बहुमत नहीं है। यह बहुत साफ स्टैंड था। पर उसके अलावा किसी पार्टी ने नहीं कहा कि वह सरकार नहीं बनाएगी।

शिव सेना ने दो टूक अंदाज में कहा कि वह सरकार बनाएगी और उसे दो दिन का समय दिया जाए। सवाल है कि जब राज्यपाल चाहते हैं कि सरकार बने और दूसरी सबसे बड़ी पार्टी सरकार बनाने का दावा कर रही है तो उसे समय देने में क्या दिक्कत थी? यह भी बहुत साफ तौर पर दिख रहा है कि तीन पार्टियां मिल कर सरकार बनाने का प्रयास कर रही हैं।

यह राज्यपाल महोदय को भी दिख ही रहा होगा। फिर भी अपने विवेक का इस्तेमाल सरकरा बनाने के नहीं, बल्कि राज्यपाल शासन लगाने के लिए किया।
तभी यह सवाल है कि क्या ऐसी स्थिति में सरकार बन पाएगी? क्या भाजपा अपनी तीन विरोधी पार्टियों की सरकार बनने देगी? ध्यान रहे भाजपा के नेता कहने लगे हैं कि वे 145 का आंकड़ा जुटा लेंगे। एक नेता ने कहा है कि उसके पास 122 विधायकों का समर्थन है और सरकार वहीं बनाएगी। 2014 में भी भाजपा को 122 सीटें मिली थीं और उसने सरकार बनाई थी। इस बार उसे मिली 105 सीटें हैं पर निर्दलियों को मिला कर आंकड़ा 122 का बताया जा रहा है। सो, सरकार बनाने के प्रयास में लगी विपक्षी पार्टियों के लिए रास्ता आसान नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares