आधी रात का एक और मास्टर स्ट्रोक!

भाजपा की केंद्र सरकार ने एक और मास्टर स्ट्रोक चला है और वह भी आधी रात को। इससे पहले भी नरेंद्र मोदी की सरकार के मास्टर स्ट्रोक रात को ही चले गए थे। प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का ऐलान भी आठ नवंबर 2016 को रात आठ बजे ही किया था। उसके बाद देश में सबसे बड़ा कथित कर सुधार वस्तु व सेवा कर, जीएसटी का बिल भी आधी रात को घंटा बजा कर लागू किया गया था। उसके लिए तो आधी रात को संसद के दोनों सदनों का साझा सत्र बुलाया गया था। आजादी की रात वाला माहौल बनाया गया था।

बहरहाल, उन दोनों मास्टर स्ट्रोक का क्या हस्र हुआ वह पूरे देश देख रहा है। नोटबंदी और जीएसटी दोनों ने देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है। अभी आगे बहुत दिन तक लोग इसके असर को महसूस करते रहेंगे। उसी तरह अब सरकार ने तीसरा मास्टर स्ट्रोक नागरिकता संशोधन बिल का चला है। इसके जरिए सरकार ने भारत के तीन मुस्लिम बहुल पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर आने वाले गैर मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देगी। यह बिल भी लोकसभा में सोमवार को छह-सात घंटे की चर्चा के बाद आधी रात को पास किया गया।

सोमवार को आधी रात के बाद करीब 12 बज कर चार मिनट पर यह बिल पास किया गया। सवाल है कि क्या सरकार ने जान बूझकर इसे आधी रात में पास कराने का फैसला किया था? ज्यादातर नेता यहीं मान रहे हैं। भाजपा के अपने नेता भी मान रहे हैं कि आधी रात तक इसे खींचने का पीछे एक मकसद था। देश को आजादी आधी रात को मिली थी और पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उस समय देश को संबोधित किया था। वैसे ही गृह मंत्री अमित शाह ने आधी रात को संसद में भाषण किया और फिर बिल पास हुआ। भाजपा के नेता इसे हिंदुओं की आजादी का बिल बता रहे हैं।

अमित शाह ने इस बिल को सोमवार को प्रश्न काल के बाद पेश कर दिया था। तब एक घंटे की चर्चा हुई थी और मत विभाजन के जरिए इसे पेश किया गया था। उसी समय इसके भविष्य का पता चल गया था। पर सरकार ने तुरंत इस पर चर्चा कराने की बजाय इसे शाम पांच बजे तक के लिए टाल दिया। अगर सरकार को लगता है कि यह इतना ही अहम है तो उसी समय चर्चा शुरू हो जाती और शाम पांच-छह बजे तक बिल पास हो जाता। सरकार इस पर मंगलवार को भी चर्चा करा कर पास करा सकती थी। पर चर्चा के लिए सोमवार को ऐसा समय चुना गया, जिससे बिल आधी रात को पास हो।

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