नाना पटोले को क्यों बनाया स्पीकर?

यह हैरान करने वाली बात है कि कांग्रेस ने दो साल पहले भाजपा छोड़ कर आए नेता नाना पटोले को स्पीकर बना दिया। वह भी ऐसे समय में जब स्पीकर का पद सबसे अहम है। नाना पटोले पहले कांग्रेस में रहे हैं। उन्होंने 1991 से कांग्रेस की ही राजनीति की है। पर बाद में वे भाजपा में चले गए थे और भाजपा की टिकट पर सांसद भी बने। फिर वे भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में आए। पार्टी ने उनको नागपुर से चुनाव लड़ाया और बताया जा रहा है कि भाजपा के कई बड़े नेताओं ने नितिन गडकरी को नुकसान पहुंचाने के लिए पटोले की मदद की। सोचें, ऐसे व्यक्ति को स्पीकर बना कर कांग्रेस ने क्या मिसाल कायम की है? कांग्रेस ने वह भी ऐसे समय में किया है, जब बाहर से आए नेताओं को पद देने की वजह से कांग्रेस को कर्नाटक से झारखंड तक मुश्किलें हुई हैं।

बहरहाल, कहा जा रहा है कि राहुल गांधी ने नाना पटोले का नाम तय कराया। ध्यान रहे राहुल ने ही जेडीएस से आए सिद्धरमैया को कर्नाटक में मुख्यमंत्री बनवाया था और जेवीएम से आए अजय कुमार को झारखंड का प्रदेश अध्यक्ष बनवाया था। अजय कुमार अध्यक्ष पद से हटते ही पार्टी छोड़ गए और सिद्धरमैया के कारण ही कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिरी थी। इससे लगता है राहुल गांधी ने कोई सबक नहीं लिया। बताया जा रहा है कि सोनिया गांधी पृथ्वीराज चव्हाण को स्पीकर बनाना चाहती थीं। उन्होंने नाम तय कर दिया था पर राहुल नाना पटोले के लिए अड़ गए। सो, अंत में उनका नाम तय हुआ। जब महाराष्ट्र में सरकार बनाने की कवायद चल रही थी तब राहुल नदारद थे। उस समय सोनिया गांधी की टीम ने सब कुछ तय कराया। और जब सरकार बनने लगी तब राहुल ने कमान संभाल ली। पहले मंत्री बनाए गए बाला साहेब थोराट और नितिन राउत भी राहुल के करीबी हैं और नाना पटोले भी उनके चुने हुए हैं। कांग्रेस नेता भरोसे में नहीं हैं कि जरूरत पड़ने पर नाना पटोले क्या करेंगे।

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