सरकार के नवरत्नों के क्या कहने!

हर सरकार के ‘नवरत्न’ होते हैं। इस सरकार के भी हैं। ज्यादातर ऐसे हैं, जो बिना कुछ किए नवरत्न की कुर्सी पर आसीन हो गए हैं। बिना कुछ किए का मतलब है कि या तो राज्यसभा से आए हैं या लहर में बहते हुए दिल्ली पहुंच गए हैं। ऐसे नवरत्न अपने बयानों से आए दिन कमाल कर रहे हैं। लगातार चार बार राज्यसभा के लिए चुने गए और पहली बार लोकसभा में पहुंचे दो बड़े विभागों के केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि दो अक्टूबर को रिलीज हुई तीन फिल्मों ने एक दिन में 120 करोड़ रुपए कमाए। सो, कहां है मंदी? आलोचना हुई और संभवतः ऊपर से दबाव बना तो उन्होंने बयान वापस ले लिया। ध्यान रहे उन्होंने नोटबंदी का समर्थन करते हुए कहा था कि इससे वेश्यावृत्ति में कमी आई है।

हालांकि ऐसा नहीं है कि ऐसे अजीबोगरीब तर्क देने वाले वे इकलौते मंत्री हैं। खुद वित्त मंत्री ने कहा था कि गाड़ियों की बिक्री इसलिए कम हुई है क्योंकि युवा इन दिनों किश्तें देने से बचना चाहते हैं और ओला-उबर का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। पर दोपहिया और बड़े व्यावसायिक वाहनों की बिक्री क्यों कम हो रही है इस बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा था। अब सोशल मीडिया में चर्चा है कि अपने तर्कों से रविशंकर प्रसाद ने निर्मला सीतारमण को पीछे छोड़ दिया है और इस तरह वित्त मंत्री के दावेदार बन गए हैं।

बहरहाल, निर्मला सीतारमण तो पता नहीं कैसे वित्त मंत्री बन गईं, वरना इस पद के सबसे बड़े दावेदार पीयूष गोयल थे। वे कार्यकारी वित्त मंत्री के तौर पर दो बार काम कर चुके हैं। पर उन्हें वाणिज्य और रेल मंत्रालय मिला। चूंकि मंदी पर बोलने का अधिकार हर मंत्री को है इसलिए उन्होंने भी बयान दिया था और कहा था कि कोई मंदी नहीं है, लोगों को गणित के चक्कर नहीं पड़ना चाहिए। अगर गणित के चक्कर में पड़े होते तो आइंस्टीन गुरुत्वाकर्षण की खोज नहीं कर पाते। बाद में लोगों ने उन्हें आइंस्टीन और न्यूटन का फर्क बताया। एक मंत्री ने भादो के महीने और श्राद्ध पक्ष को भी मंदी के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

एक और नवरत्न जितेंद्र सिंह हैं, जो प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री हैं। वे मंदी पर तो नहीं बोले हैं पर उन्होंने भी कम मनोरंजक बयान नहीं दिए हैं। उन्होंने तो यहां तक कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘भारत पिता’ का जो तमगा दिया है उसे सबको मानना चाहिए और जो नहीं मानेगा वह सच्चा भारतवासी नहीं होगा। कश्मीर में नेताओं की नजरबंदी और पाबंदियों के बारे में भी उन्होंने कई मनोरंजक बयान दिए। बाकी रमेश पोखरियाल निशंक, गिरिराज सिंह आदि जैसे केंद्रीय मंत्री हैं, बिप्लब देब जैसे मुख्यमंत्री हैं और कई राज्यपाल व पूर्व राज्यपाल भी हैं, जो अपने बयानों से देश का मनोरंजन करते रहते हैं।

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