बिखरे विपक्ष को एक करने को कुछ करना होगा

विपक्षी पार्टियों में तमाम प्रयासों के बावजूद एकता नहीं बन पा रही है। लोकसभा चुनाव से पहले सारी पार्टियां एक दूसरे के संपर्क में थीं और सब एक साझा विपक्ष के प्रयास में थे। पर नतीजों के बाद सारी पार्टियों ने अलग अलग रास्ते पकड़ लिए। पुराने सहयोगी भी अलग हो गए। कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस का तालमेल टूटा तो उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा का तालमेल टूट गया। झारखंड और बिहार में भी महागठबंधन बिखर गया। माना जा रहा था कि नई लोकसभा में संसद के पहले सत्र के दौरान विपक्ष के नेता मिलेंगे पर ऐसा नहीं हुआ। अब भी कांग्रेस के प्रयासों के बावजूद विपक्षी पार्टियां साथ नहीं आ रही हैं।

पिछले दिनों सोशल मीडिया प्लेटफार्म व्हाट्सएप हैक करने और सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं की जासूसी किए जाने का मामला सामने आया। इजराइल की एक कंपनी के बनाए सॉफ्टवेयर के जरिए यह जासूसी की गई थी। इसकी राष्ट्रपति से शिकायत करने और इस मुद्दे को लोगों के बीच ले जाने के लिए विपक्षी पार्टियों की एक बैठक सोमवार को हुई। कांग्रेस की पहल पर हुई इस बैठक में लगभग सभी बड़ी विपक्षी पार्टियां गैरहाजिर रहीं। सपा, बसपा, एनसीपी और आम आदमी पार्टी के नेता इसमें शामिल नहीं हुए। दोनों बड़ी वामपंथी पार्टियों- सीपीआई और सीपीएम के नेता बैठक में जरूर शामिल हुए पर उसके बाद साझा प्रेस कांफ्रेंस से पहले ही चुपचाप निकल गए। ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस ने जैसे तैसे धरपकड़ कर विपक्षी नेताओं को बैठाया। फिर भी कांग्रेस नेताओं को लग रहा है कि संसद के अगले सत्र में फिर से एकता का प्रयास होगा।

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