सीएबी पर कई विपक्षी पार्टियों में दुविधा

नागरिकता संशोधन बिल पर विपक्षी पार्टियों के सांसदों में वैसी ही दुविधा पैदा हो गई है, जैसी कश्मीर के मसले पर हुई थी। इस दुविधा का नतीजा यह हुआ था कि कई पार्टियों ने अपनी पुरानी स्थापित लाइन छोड़ कर सरकार का समर्थन किया था और कई पार्टियों के सांसदों ने जान बूझकर सदन की कार्यवाही छोड़ दी थी। कांग्रेस के ही कई सांसद सदन से गैरहाजिर हो गए थे। समाजवादी पार्टी के सांसद भी सदन से गैरहाजिर रहे थे और तृणमूल कांग्रेस के भी सांसदों ने इस दुविधा के कारण सदन की कार्यवाही छोड़ी थी। जबकि इन पार्टियों ने सरकार का विरोध किया था।

उसी तरह ऐसा लग रहा है कि नागरिकता कानून में संशोधन के बिल पर भी होगा। जो पार्टियां पहले विरोध कर रही थीं, जैसे असम गण परिषद या जनता दल यू ने अब समर्थन कर दिया है। महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ मिल कर सरकार चला रही शिव सेना ने भी इस मामले में सरकार का समर्थन किया है। तभी कई विपक्षी पार्टियों में दुविधा है। दक्षिण भारत की पार्टियों जनता दल एस, तेलंगाना राष्ट्र समिति और डीएमके में भी दुविधा है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सपा आदि पार्टियों के भी कुछ सांसद पाला बदल सकते हैं या सदन की कार्यवाही से गैरहाजिर हो सकते हैं। असल में सरकार ने इसे ऐसा हिंदू हित के बिल का नाम दिया है कि विपक्षी पार्टियों को समर्थन के अलावा और कुछ सूझ नहीं रहा है।

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