इस सत्र में क्या धमाका होगा?

संसद का पिछला सत्र बड़ा धमाके वाला रहा था। सरकार ने ऐन मौके पर संसद का कामकाज एक हफ्ते के लिए बढ़ाया था। तब किसी को अंदाजा नहीं था कि सरकार इस सत्र में कश्मीर का मुद्दा ला रही है। जब यह पक्का हो गया है कि कश्मीर पर कोई पहल होने जा रही है तब भी सब यह अंदाजा लगा रहे थे कि शायद सरकार अनुच्छेद 35ए खत्म करने का प्रस्ताव लाएगी। पर सरकार ने सबको चौंकाते हुए अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाने और जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो हिस्सों में बांटने का काम कर दिया।

इस बार भी कुछ धमाके की तैयारी है। भारतीय जनता पार्टी के सभी सांसदों से कहा गया है कि वे एक दिसंबर के बाद दिल्ली में ही रहें। आमतौर पर संसद सत्र के दौरान सांसद सोमवार से शुक्रवार तक दिल्ली में रहते हैं और शुक्रवार की शाम को अपने क्षेत्र के लिए निकल जाते हैं। पिछले सत्र में सांसदों को शनिवार और रविवार को दिल्ली में रोकने के लिए भाजपा की एक कार्यशाला रख दी गई थी। इस कार्यशाला के बहाने सांसद तीन और चार अगस्त को दिल्ली में थे और पांच अगस्त को सोमवार की सुबह से ही सारे सांसद संसद में थे, जब सरकार ने कश्मीर का बड़ा ऐलान किया।

उससे अलग इस बार सांसदों को सीधे निर्देश दिया गया है कि वे दिल्ली न छोड़ें। क्षेत्र के सारे कार्यक्रम रद्द करें और संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में मौजूद रहें। पार्टी के इस निर्देश के बाद अटकल लगाई जा रही है कि सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक लाने वाली है। ध्यान रहे बुधवार को भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार इस कानून में संशोधन करेगी ताकि पड़ोसी देशों से प्रताड़ित होकर आने वाले सभी गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जा सके।

सो, ऊपरी तौर पर लग रहा है कि सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक लाने वाली है इसलिए सभी सांसदों को दिल्ली में रहने को कहा गया है। पर संभव है कि सरकार कोई बड़ा धमाका करने की तैयारी में हो। जानकार सूत्रों का कहना है कि सरकार समान नागरिक संहिता बनाने पर भी विचार कर रही है। अगर इसका विधेयक तैयार हो गया तो सरकार सीधे उसे संसद में पेश कर सकती है। पहले सहमति बनाने का प्रयास नहीं होगा। वैसे भी सरकार ने राज्यसभा में कामचलाऊ बहुमत का जुगाड़ कर लिया है।

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