रघुवर ने सारे सीएम दावेदारों को अटकाया

पांच साल पहले रघुवर दास झारखंड में मुख्यमंत्री बने थे तब यह पद उनको नरेंद्र मोदी और अमित शाह की कृपा से मिला था।

उस समय मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार चुनाव हार गए थे

फिर भी कई नेताओं को लेकर लगातार चर्चा चलती रही कि वे मुख्यमंत्री बन सकते हैं

या जितना कद मुख्यमंत्री के बराबर था।

इनमें से कुछ रघुवर दास के करीबी थे तो कुछ विरोधी।

इस बार टिकट बंटवारे में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सबको निपटाने का संकल्प दिखाया है।

उनके मुकाबले मुख्यमंत्री पद के जितने दावेदार बने थे, अभी तक सबकी टिकट या तो अटकी या कट गई है।

इस काम में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रभारी ओम प्रकाश माथुर का पूरा समर्थन उनको मिल रहा है।

पांच साल पहले आदिवासी नेता दिनेश उरांव सबसे प्रबल दावेदार थे।

उनको स्पीकर बनाया गया था। इस बार 52 उम्मीदवारों की पहली सूची में उनका नाम नहीं था।

जेएनएयू से पढ़े और संघ समर्थित दूसरे आदिवासी शिवशंकर उरांव थे इस बार उनकी टिकट कट गई है।

सरकार में नंबर दो मंत्री नीलकंठ मुंडा की थी, जो सीएम के भी करीबी हैं। पर उनकी भी टिकट अटकी हुई है।

मुख्यमंत्री के खिलाफ लगातार मुखर रहे पार्टी के वरिष्ठ नेता सरयू राय की टिकट की भी घोषणा अभी तक नहीं हुई है।

पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में मंत्री अर्जुन मुंडा अपनी पत्नी मीरा मुंडा के लिए टिकट चाहते थे

पर मुख्यमंत्री ऐसा नहीं चाहते तो, उनकी भी टिकट अटकी हुई है।

ध्यान रहे इसी अंदाज में देवेंद्र फड़नवीस ने भी महाराष्ट्र में टिकट बांटा था और चुनाव के बाद उनकी कैसी स्थिति बनी है।

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