राहुल लोकसभा के प्रचार में अटके हैं!

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ऐसा लग रहा है कि लोकसभा चुनाव के प्रचार में ही अटके हैं। उन्होंने पिछले साल तीन राज्यों- मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव प्रचार में और उसके बाद मार्च से मई तक लोकसभा चुनाव के प्रचार में जो बातें कहीं, वहीं सारी बातें वे महाराष्ट्र और हरियाणा के प्रचार में कर रहे हैं। सिर्फ एक फर्क है कि वे इस बार राफेल का मुद्दा नहीं उठा रहे हैं और चौकीदार चोर है का नारा नहीं दे रहे हैं। वे इतना भी नहीं कह रहे हैं कि सरकार राफेल विमानों की असल कीमत बताए। यह मुद्दा आज भी अपनी जगह कायम है पर कांग्रेस से सारे नेता ऐसे डरे हैं कि वे इसे उठाना नहीं चाहते।
इसके अलावा राहुल गांधी का समूचा भाषण वहीं है, जो छह महीने पहले था, जबकि उसके बाद कई चीजें बदल गई हैं। कई नए मुद्दे आए गए हैं। नए आंकड़े आ गए हैं पर ऐसा लग रहा है, जैसे राहुल को इन मामलों के बारे में पता नहीं है। वे अब भी डोकलाम के मसले पर अटके हैं। य़ह मामला 2017 का है और लंब गतिरोध के बाद इसे सुलझा लिया गया था। फिर भी विपक्ष ने इसे पिछले चुनाव में उठाया था। पर चीन का मामला तो अब डोकलाम से काफी आगे बढ़ गया है। जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने के बारे में कांग्रेस की चाहे जो राय रही हो पर जब चीन ने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में उठाया तो उसका विरोध होना चाहिए। पर राहुल मुद्दा नहीं उठा रहे हैं। वे प्रधानमंत्री मोदी से यह नहीं कह रहे हैं कि उन्होंने क्यों नहीं चीन के राष्ट्रपति से पूछा कि कश्मीर जब भारत का आंतरिक मामला है तो चीन उसे क्यों सुरक्षा परिषद में ले गया। इसके बदले वे पूछे रहे हैं कि मोदी ने शी जिनफिंग से डोकलाम के बारे में क्यों नहीं बात की।
इसी तरह राहुल इस बात पर अटके हैं कि सरकार ने 15 बड़े उद्योगपतियों के साढ़े पांच लाख करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया। वे यह नहीं पूछ रहे हैं कि सरकार ने कारपोरेट को डेढ़ लाख करोड़ रुपए की राहत कहां से दी है और रिजर्व बैंक का एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए निकाल कर सरकार क्या करेगी या सरकार क्यों मुनाफा कमाने वाली कंपनियों को बेचने पर तुली है। इसी तरह से पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक या लक्ष्मी विलास बैंक जैसे कई सहकारी बैंकों में संकट चल रहा है। आम लोगों को मुश्किल हो रही है पर राहुल गांधी ये मुद्दे नहीं उठा रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि उन्होंने लोकसभा चुनाव के समय जिन मुद्दों पर बोलने का अभ्यास किया था उसे ही दोहरा रहे हैं।

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