मध्य प्रदेश में सिंधिया ही मानो विपक्ष

मध्य प्रदेश में मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा और चुप हो गई है। उसने विपक्षी पार्टी की भूमिका कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को आउटसोर्स कर दी है। राज्य में विपक्ष की भूमिका अब सिंधिया ही निभा रहे हैं। हर मसले पर वे राज्य की कमलनाथ सरकार को कठघरे में खड़ा करते हैं। यहां तक कि पुराने मुद्दे भी, जिसे भाजपा के लोग भी भूल गए हैं, उस पर भी वे मुख्यमंत्री से सवाल पूछते हैं। सिंधिया ऐसे सक्रिय विपक्ष हो गए हैं कि वे बात बात पर मुख्यमंत्री को खुली चिट्ठी लिख दे रहे हैं। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी सरकार से सवाल पूछते हैं और चिट्ठी लिखते हैं पर वे विपक्षी पार्टी की तरह नहीं कर रहे हैं। कुल मिला कर कमलनाथ बनाम दिग्गी राजा बनाम सिंधिया के झगड़े में प्रदेश की सरकार और कांग्रेस संगठन दोनों मुश्किल में हैं।
सिंधिया ने पिछले दिनों राज्य में दो दलित बच्चों की पीट पीट कर हत्या किए जाने का मामला उठाया था। इन बच्चों को खुले में शौच करते समय मारा गया था। सिंधिया ने उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि वे दोनों बच्चों के परिजनों को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा दें और दस-दस बीघा जमीन दें। इतना भारी भरकम मुआवजा न तो बच्चों के परिजनों ने मांगा था और न विपक्षी पार्टी भाजपा ने।
उससे पहले सिंधिया ने किसानों की कर्ज माफी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने दो लाख रुपए तक के कर्ज माफ करने का वादा किया था पर सरकार सिर्फ 50 हजार के कर्ज माफ कर रही है। इस पर मुख्यमंत्री को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकार दो लाख तक कर्ज माफ करेगी। अब सिंधिया ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिख कर स्थानीय निकायों से योजनाओं में कटौती का मुद्दा उठाया है। वे लगभग रोज कोई एक मुद्दा उठा कर मुख्यमंत्री से सवाल पूछ रहे हैं। माना जा रहा है कि झाबुआ उपचुनाव के बाद ही मुख्यमंत्री को राहत मिलने वाली है। वह भी तब जब कांग्रेस यह सीट जीत जाए।

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