संजय राउत इतने गुस्से में क्यों हैं?

शिवसेना के राज्यसभा सांसद और मुख्य प्रवक्ता संजय राउत भाजपा और देवेंद्र

फड़नवीस को लेकर इतने गुस्से में क्यों हैं? वे लगातार हमलावर हैं।

24 अक्टूबर को नतीजे आने के बाद उन्होंने ही मोर्चा संभाला और ऐसी ऐसी बातें कहीं,

जिसके बाद दोनों का साथ आना नामुमकिन सा हो गया।

अब अगर आगे कभी भाजपा और शिव सेना साथ आते हैं तब भी भाजपा नेताओं के

साथ संजय राउत के संबंध सामान्य नहीं हो सकते हैं।

सवाल है वे किसी निजी कारण से इतने नाराज हैं या शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने उनको इतने ही आक्रामक अंदाज में बात कहने के लिए

अधिकृत किया था?

जानकार सूत्रों का कहना है कि उनकी निजी नाराजगी पहले है।

असल में वे केंद्र सरकार में मंत्री बनने वाले थे।

मई में नरेंद्र मोदी की दोबारा सरकार बनी तो शिव सेना की ओर से मंत्री पद के लिए उनका नाम था।

पर भाजपा के नेताओं ने उसमें फच्चर डाला।

पहले तो भाजपा ने कहा कि 18 सांसद होने के बावजूद शिव सेना को एक ही कैबिनेट मंत्री का पद मिलेगा।

पिछली सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे अनंत गीते इस बार चुनाव हार गए थे।

सो, उनकी जगह एक नया चेहरा सरकार में जाने वाला था।

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कहा जा रहा है कि भाजपा ने संजय राउत के नाम पर आपत्ति की। उनको लगा कि राउत बहुत आक्रामक हैं

और मंत्रालय में अपने हिसाब से काम करेंगे।

जब उनका नाम रोका गया तो शिव सेना की ओर से अरविंद सावंत का नाम आगे किया गया।

वे इस बार लोकसभा का चुनाव जीते हैं। उनको अनंत गीते की जगह भारी उद्योग मंत्री बना दिया गया।

अगर भाजपा दूसरा कैबिनेट बर्थ देने को राजी हो जाती तब भी संजय राउत केंद्र में मंत्री बन जाते।

पर भाजपा उसके लिए भी राजी नहीं हुई। सो, एक तो राउत की निजी खुन्नस भाजपा से थी।

दूसरे, पिछले पांच साल भाजपा के नेताओं ने शिव सेना के साथ जैसा बरताव किया था उससे भी उसके नेता नाराज थे।

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पांच साल तक केंद्र की सरकार में शिव सेना की कोई हैसियत नहीं रही और महाराष्ट्र में भी आरएसएस की पहल पर राज्य सरकार में लौटी

शिव सेना की कोई हैसियत नहीं थी।

उसे बिना महत्व के मंत्रालय मिले थे और पूरी सरकार अकेले मुख्यमंत्री चला रहे थे।

पहले महाराष्ट्र में बाल ठाकरे को जो महत्व मिलता था, उसके दसवें हिस्से के बराबर भी महत्व उद्धव ठाकरे को नहीं मिला।

इसलिए पहला मौका मिलते ही उद्धव ठाकरे ने भाजपा को उसकी हैसियत दिखाने का फैसला किया।

इस काम के लिए उन्होंने संजय राउत को इसलिए चुना क्योंकि उनको पता था कि वे पहले से भाजपा से आहत बैठे हैं।

सो, दोनों कारणों से राउत ने भाजपा से अपने और शिव सेना के कथित अपमान का बदला लेना शुरू किया।

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