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आदित्य धर ने दिखाई ‘धुरंधर’ के संगीत की पर्दे के पीछे की झलक

स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर’ के सबसे बड़े धुरंधर साबित हुए हैं संगीतकार शाश्वत सचदेवा। उन्होंने न सिर्फ फिल्म के लिए शानदार गाने बनाए, बल्कि उन गानों को पूरी दुनिया तक पहुंचाने का काम भी किया। शाश्वत सचदेव ने आदित्य धर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘धुरंधर’ और इसके सीक्वल ‘धुरंधर 2’ में हाई-ऑक्टेन एक्शन फिल्म के लिए तेज रफ्तार वाले, सिंथ बीट्स पर आधारित पॉप और रैप स्टाइल के गाने तैयार किए।

फिल्म की सफलता और गानों की जबरदस्त पॉपुलैरिटी को देखते हुए निर्देशक आदित्य धर ने इंस्टाग्राम के जरिए शाश्वत की जमकर तारीफ की। उन्होंने इंस्टाग्राम पर गानों की तैयारी के दौरान की गई बैकस्टेज तस्वीरें और वीडियो भी शेयर किए। इनमें शाश्वत सचदेवा समेत सभी गायकों और संगीतकारों को देखा जा सकता है।

आदित्य ने लिखा, “शाश्वत सचदेव को सलाम। कुछ साथी सिर्फ काम के साथी नहीं होते बल्कि, वे धीरे धीरे परिवार जैसे बन जाते हैं। शाश्वत मेरे लिए ठीक ऐसे ही रहे हैं। वे ‘धुरंधर’ के संगीतकार ही नहीं बल्कि, मेरे एक छोटे भाई जैसे हैं। हमने साथ में  बेहद गहरे क्रिएटिव पलों को साझा किया।

निर्देशक ने आगे लिखा, “धुरंधर पार्ट 1′ के लिए 9 गाने सिर्फ 9 दिनों में और पूरा बीजीएम 6 दिनों में। फिर ‘धुरंधर पार्ट 2’ 14 गाने 11 दिनों में, बीजीएम 3 दिनों में पूरा किया गया। इस गति, पैमाने, भावनात्मक गहराई और बेहतरीन क्वालिटी के साथ यह काम सचमुच जबरदस्त था।

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निर्देशक ने बताया कि दोनों एल्बम मात्र 3 महीने के अंदर रिलीज होने के बावजूद ग्लोबल म्यूजिक चार्ट्स पर टॉप पर पहुंच गए। उन्होंने लिखा, “फिल्म के लगभग हर गाने को दुनिया भर से प्यार और सराहना मिली, जो किसी भी फिल्म के लिए बहुत कम देखने को मिलता है।

आदित्य धर ने अपने पोस्ट में याद करते हुए लिखा, “लगभग 15 दिनों तक मेरा घर सिर्फ घर नहीं रहा, बल्कि एक जीवंत म्यूजिक स्टूडियो बन गया था। हर कमरे में कुछ न कुछ काम चल रहा था। लिविंग रूम में म्यूजिक बन रहा था, बेडरूम में रिकॉर्डिंग हो रही थी और बालकनी में गाने लिखे जा रहे थे। गायक और संगीतकार लगातार आते-जाते रहे। दिन और रात एक-दूसरे में घुल-मिल गए। 21-22 घंटे तक के लंबे सेशन चलते रहे। समय का पता ही नहीं चलता था, बस सही चीज बनाने का जुनून था।

निर्देशक ने शाश्वत की मेहनत की खास तारीफ करते हुए लिखा, “इस पूरे प्रोजेक्ट के केंद्र में शाश्वत ही थे। वे सब कुछ संभाल रहे थे। क्रिएट करना, कंपोज करना, गाइड करना, फीडबैक देना और हर चीज को बेहतर बनाना। कई बार वे बीमार भी थे, कम नींद ले रहे थे और स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे थे, फिर भी वे बिना रुके, बिना कोई समझौता किए पूरे जोश के साथ मौजूद रहे। ऐसी लगन और दृढ़ता आजकल बहुत कम देखने को मिलती है।

Pic Credit : ANI

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