भारतीय सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री विद्या बालन 22 से 24 जनवरी 2027 तक आयोजित होने वाले इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ पर्थ (आईएफएफपी) के पहले संस्करण का उद्घाटन करेंगी। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में पहली बार आयोजित हो रहे इस महोत्सव में वह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी।
इस महोत्सव का उद्देश्य पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के दर्शकों तक भारतीय सिनेमा की विविधता, समृद्ध कहानियों और विभिन्न भाषाओं की फिल्मों को पहुंचाना तथा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है।
इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ पर्थ, इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (आईएफएफएम) और इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ सिडनी (आईएफएफएस) की टीम की नई पहल है। मेलबर्न और सिडनी में भारतीय सिनेमा को मिले मंच की सफलता के बाद अब पर्थ में भी भारतीय फिल्मों, फिल्म निर्माताओं और दर्शकों को जोड़ने के लिए एक नया मंच तैयार किया जा रहा है।
महोत्सव की घोषणा पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के प्रीमियर रोजर कुक की भारत यात्रा के दौरान की गई थी। इस पहल को दोनों क्षेत्रों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक और रचनात्मक संबंधों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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विद्या बालन भारतीय सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल हैं। उन्होंने अपने करियर में महिला-केंद्रित फिल्मों और विविध विषयों पर आधारित कहानियों में उल्लेखनीय भूमिकाएं निभाई हैं। महोत्सव में उनकी उपस्थिति से भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने के प्रयासों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
महोत्सव की घोषणा पर फेस्टिवल डायरेक्टर मितु भौमिक लांगे एएम ने कहा कि पर्थ में भारतीय फिल्म महोत्सव की शुरुआत करना गर्व का क्षण है। मेलबर्न और सिडनी में सफल मंच तैयार करने के बाद अब पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के नए दर्शकों और फिल्म प्रेमियों तक पहुंचने का अवसर मिला है।
उन्होंने कहा कि सिनेमा लोगों को जोड़ने, सीमाओं से परे जाने और एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझने का माध्यम है। विद्या बालन का पहले महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना विशेष है। महोत्सव के जरिए भारतीय कहानियों की विविधता का जश्न मनाने के साथ भारत और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ पर्थ में भारतीय सिनेमा की विभिन्न भाषाओं, शैलियों और विषयों पर आधारित फिल्मों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही फिल्म निर्माताओं, दर्शकों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच संवाद, सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
Pic Credit : UNI
