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अब अखिल भारतीय फ़िल्में

यशराज फिल्म्स की रनबीर कपूर को लेकर बनाई गई ‘शमशेरा’ के पिटने पर कई लोग इसलिए चकित हैं कि दक्षिण से आने वाली ऐसी ही फिल्में सैकड़ों करोड़ कमाती हैं और इसने पचास करोड़ पर ही दम तोड़ दिया। असल में पिछले कुछ महीनों से बॉलीवुड की फिल्में वैसी कमाई के लिए तरस रही हैं जो इस दौरान दक्षिण की कई फिल्में करके दिखा चुकी हैं। ‘जय भीम’, ‘पुष्पा’, ‘आरआरआर’, ‘केजीएफ- चैप्टर दो’ और ‘विक्रम’ की अखिल भारतीय सफलता ने हिंदी दर्शकों के बीच नया रुझान पैदा किया है और वे दक्षिण के अभिनेता व अभिनेत्रियों के भी फ़ैन हो गए हैं। रजनीकांत व कमल हासन के बाद ‘बाहुबली’ के कारण निर्देशक राजामौली और अभिनेता प्रभास को हिंदी के दर्शक पहले से जानते थे, मगर अब वे एनटीआर जूनियर, अल्लू अर्जुन, सूर्या शिवकुमार, रामचरन, यश, नागा चैतन्य, विजय देवरकोंडा, विजय सेतुपति, फहाद फासिल, रश्मिका मंधाना, सामंथा रुथ प्रभु, नयनतारा वगैरह को भी पहचानने लगे हैं और उनकी फिल्मों का इंतजार करने लगे हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।

वैसे पिछले दिनों हिट हुईं दक्षिण की फिल्मों में ‘जय भीम’ को छोड़ किसी में भी कोई नयापन या नई कहानी नहीं थी। बस उनमें मेहनत ज्यादा थी, कैनवास बड़ा था और वे ज्यादा इन्टेंस थीं। ‘शमशेरा’ में इन गुणों की कमी बताई जा रही है। बहरहाल, दक्षिण की फिल्मों ने बॉलीवुड के निर्माताओं का आत्मविश्वास हिला दिया है। हालत यह हो गई है कि शाहरुख खान ने अपनी फिल्म ‘जवान’ में दीपिका पादुकोण के साथ दक्षिण की अभिनेत्री नयनतारा और वहीं के अभिनेता विजय सेतुपति को भी लिया है और निर्देशन का जिम्मा दक्षिण के ही ऐटली को सौंपा है। इस फिल्म को दक्षिण की भाषाओं में भी रिलीज किया जाएगा। लंबी असफलता के कई साल बाद शाहरुख तीन फिल्में ‘पठान’, ‘डंकी’ और ‘जवान’ लेकर आ रहे हैं और वे कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। मुंबई के दूसरे निर्माता भी ऐसे ही कॉम्बीनेशन प्लान कर रहे हैं। लेकिन अगर कल को बॉलीवुड की पारंपरिक सोच वाली दो-तीन फिल्में हिट हो गईं तो क्या यह कॉम्बीनेशन फिर बिखरने लगेगा और ये निर्माता फिर उसी ढर्रे पर लौट आएंगे?

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