nayaindia kaun banega crorepati ‘एक्सपर्ट’ हटाने का समझदार फ़ैसला
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‘एक्सपर्ट’ हटाने का समझदार फ़ैसला

अमिताभ बच्चन के हिंदी, अंग्रेज़ी और काफ़ी कुछ उर्दू के तलफ्फुज़ या उच्चारण का बहुत से लोग लोहा मानते हैं। मगर दूरदर्शन की एक ऐंकर ने कुछ बरस पहले अमिताभ बच्चन का जिक्र आने पर मुझसे कहा था कि ‘आप कुछ भी कहें, लेकिन एक शब्द ऐसा है जिसे अमिताभ गलत बोलते हैं। वे ‘नमश्कार’ बोलते हैं जबकि होता तो ‘नमस्कार’ है। कभी भी सुन लीजिएगा।‘ और हम आज तक अमिताभ बच्चन को ‘नमश्कार’ कहते सुन रहे हैं। यह अलग बात है कि अमिताभ को अदाकारी और प्रेजेंटेशन में जो महारत हासिल है उसके सामने केवल एक शब्द के उच्चारण का गलत होना कोई मायने नहीं रखता।

बहरहाल, ‘कौन बनेगा करोड़पति’ का चौदहवां संस्करण शुरू हो गया है। उसमें कौन कितने पैसे जीता, कैसे जीता और कहां अटक गया इत्यादि की खबरें भी आने लगी हैं। इस बार इस शो में हॉट सीट पर बैठने वाला जो भी व्यक्ति एक करोड़ रुपए या उससे ज्यादा जीतेगा उसे साथ में एक कार भी दी जाएगी। सबसे ज्यादा प्राइज मनी भी सात करोड़ से बढ़ा कर साढ़े सात करोड़ रुपए कर दिया गया है। आजादी के 75 साल पूरे होने पर इस गेम शो में एक नया पड़ाव भी डाला गया है। साथ ही घर पर बैठे दर्शकों के लिए हर शुक्रवार ‘प्ले अलॉन्ग’ की भी शुरूआत की गई है।

लेकिन अब ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में तीन ही लाइफलाइन होंगी। ऑस्ट्रेलिया के मशहूर टीवी शो ‘ग्रीड’ और उस जैसे अन्य विदेशी शो की देखादेखी शुरू किए गए केबीसी में पहले तीन ही लाइफलाइन हुआ करती थीं। चौथे सीज़न में एक चौथी लाइफलाइन शुरू की गई थी जिसका नाम था ‘आस्क द एक्सपर्ट।’ यह लाइफलाइन अब खत्म कर दी गई है। पता नहीं यह फैसला सिद्धार्थ बसु ने लिया या उनकी निर्माण टीम के किसी अन्य़ सदस्य ने या खुद अमिताभ बच्चन ने, लेकिन जिसने भी लिया उसने पत्रकार बिरादरी को उस ग्लानि और संकोच से बचा लिया है जो हर साल केबीसी उनके लिए लाता था।

होता यह था कि आम तौर पर केबीसी में ‘आस्क द एक्सपर्ट’ वाली लाइफलाइन के निर्वहन के लिए किसी न किसी पत्रकार को पकड़ लिया जाता था। जो पत्रकार अब तक इसमें ‘एक्सपर्ट’ बना कर पेश किए गए उन्होंने अपनी बारी आने पर हर गूढ़ से गूढ़ सवाल का बड़े धड़ल्ले से सही जवाब दिया। चाहे केबीसी की निर्माण टीम पहले से उन्हें सही उत्तर बता देती हो, मगर दर्शकों को लगता कि देखो, ये पत्रकार कितना जानकार है। समस्या यह थी कि दर्शकों में जो खुद पत्रकार थे उनमें इससे या तो ग्लानि अथवा डाह पैदा होती या वे संकोच में पड़ जाते। वे बखूबी जानते थे कि पत्रकारों को इतिहास, भूगोल, विज्ञान, साहित्य, पर्यावरण और देश-विदेश का ऐसा सटीक ज्ञान नहीं हुआ करता जो वे केबीसी में एक्सपर्ट के तौर पर बघारते दिखते थे। जो पत्रकार इस कार्यक्रम में बतौर ‘एक्सपर्ट’ लाए गए उऩमें से कई को मैं भी निजी तौर पर जानता हूं। और मैं यह भी जानता हूं कि वे किस विषय के कितने ‘एक्सपर्ट’ हैं। केबीसी को ठान लेना चाहिए कि आइंदा कभी यह लाइफलाइन फिर शुरू नहीं की जाएगी।

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