दीपा मेहता की 'फनी बॉय' ऑस्कर नामांकन के लिए हुई खारिज - Naya India
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दीपा मेहता की ‘फनी बॉय’ ऑस्कर नामांकन के लिए हुई खारिज

टोरंटो। भारतीय-कनाडाई फिल्म निमार्ता दीपा मेहता की ‘फनी बॉय’ को 93वें अकादमी पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी में ऑस्कर नामांकन के लिए खारिज कर दिया गया है।

दीपा इस फिल्म की सह-लेखिका और सह-निर्देशक भी हैं। फिल्म 1970 और 1980 के दशक के जातीय संघर्ष के दौरान की एक समलैंगिक तमिल लड़के की कहानी कहती है जो श्रीलंका में रहता था।

अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी में ऑस्कर के लिए प्रतियोगी होने के लिए फिल्म को अमेरिका से बाहर निर्मित किया जाना चाहिए और उसमें 50 प्रतिशत से अधिक संवाद विदेशी भाषा में होने चाहिए। लेकिन एकेडमी ऑफ मोशन पिक्च र आर्ट्स एंड साइंसेज के अनुसार, मेहता की एक घंटे और 49 मिनट की लंबी फिल्म में केवल 12 मिनट और 27 सेकंड के संवाद ही तमिल में या सिंहली में हैं।

इसे लेकर मेहता ने कहा है, फनी ब्वॉय बनाने की यात्रा का हर कदम मेरे और मेरी टीम के लिए बहुत अहम रहा है। पुस्तक का संदेश हमेशा लचीला और साहसिक रहा है। हम आश्चर्यचकित हैं कि फिल्म अकादमी की अंतर्राष्ट्रीय फीचर श्रेणी में प्रतिस्पर्धा में नहीं आ रही। लेकिन हम उतने ही खुश और आश्चर्यचकित हैं कि टेलीफिल्म ने इसे अकादमी अवॉर्डस के लिए बेस्ट पिक्चर और अन्य कैटेगरी में सबमिट करने में सपोर्ट किया है।

उन्होंने आगे कहा, मुझे उम्मीद है कि ‘फनी बॉय’ अपने प्रेम, साहस और करुणा की कहानी के साथ ट्रांसजेंडर्स की उम्मीदों को आगे बढ़ाएगी। फिल्म को नामांकित करने वाले टेलीफिल्म कनाडा का कहना है कि ‘फनी बॉय’ को अब बेस्ट पिक्च र और सामान्य प्रवेश श्रेणियों में पेश किया जाएगा।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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