मशहूर शायर राहत इंदौरी नहीं रहे!

इंदौर। समकालीन हिंदुस्तान के सबसे महान और मकबूल शायर राहत इंदौरी का इंतकाल हो गया। दिल में हिंदुस्तान और अपनी शायरी में इंसानियत का जज्बा लिए राहत इंदौरी मंगलवार को इस फानी दुनिया से रुखसत हो गए और अपने पीछे करोड़ों चाहने वालों को उदास छोड़ गए। मंलवार की सुबह उन्होंने खुद ही कोरोना पॉजिटिव होने की खबर ट्विटर पर दी थी और शाम होने से पहले ही उनके निधन की खबर आ गई। सत्तर साल के राहत इंदौरी दिल के मरीज थे, शायद इसलिए कोरोना उनके लिए घातक साबित हुआ।

बताया जा रहा है कि राहत इंदौरी को निमोनिया हो गया था और उन्हें लगातार तीन हार्ट अटैक भी आए। उनको अरविंदो अस्पताल में भरती कराया गया था। मंगलवार को शाम पांच बजे उनके निधन की खबर मिली। उनके निधन से सिर्फ उर्दू शायरी का स्टेज वीरान नहीं हुआ है, बल्कि भारतीय कविता की सबसे मुखर आवाज खामोश हो गई है। उनके निधन के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्विट किया कि राहत उर्दू अदब की कद्दावर शख्सियत थे। उनके जाने पर दुख हुआ है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहत इंदौरी को उन्हीं के अंदाज में आखिरी विदाई दी। शिवराज ने लिखा- एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तों, दोस्ताना जिंदगी से मौत से यारी रखो। देश और दुनिया के मशहूर शायर मुनव्वर राणा ने राहत इंदौरी के बारे में कहा है कि अगले पचास, सौ बरस तक उम्मीद नहीं कि राहत जैसा कोई दूसरा आदमी उर्दू स्टेज पर आएगा। राहत इंदौरी के साथ अनेक सम्मेलनों में मंच साझा करने वाले कुमार विश्वास ने कहा- राहत साहब हिंदुस्तानी होने पर ताउम्र फिदा रहे और गजब के फिदा रहे, हिंदी-उर्दू साहित्य के बीच सबसे मजबूत पुल थे। उन्होंने अनेक हिंदी फिल्मों में गाने भी लिखे थे।

बहरहाल, राहत इंदौरी के बेटे और युवा शायर सतलज राहत ने बताया था कि पिता चार महीने से सिर्फ नियमित जांच के लिए ही घर से बाहर निकलते थे। उन्हें चार-पांच दिन से बेचैनी हो रही थी। डॉक्टरों की सलाह पर एक्सरे कराया गया तो निमोनिया की पुष्टि हुई थी। इसके बाद सैंपल जांच के लिए भेजे गए, जिसमें वे कोरोना संक्रमित पाए गए। राहत इंदौरी को दिल की बीमारी और डायबिटीज भी थी। सांस लेने में तकलीफ के चलते उन्हें आईसीयू में रखा गया था।

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