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कनिका कपूर केस : लखनऊ पुलिस लिख गई गलत एफआईआरए

ByNI Entertainment Desk,
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कनिका कपूर केस : लखनऊ पुलिस लिख गई गलत एफआईआरए
लखनऊ। लंदन से आकर लखनऊ में कई समारोहों में हिस्सा लेने वालीं बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर के कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद लखनऊ पुलिस ने शुक्रवार की देर रात उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की। रात 11 बजकर 22 मिनट पर सीएमओ ने यह कहकर सरोजनी नगर थाने में केस दर्ज कराया कि कनिका ने होम क्वारन्टाइन के निर्देशों का उल्लंघन किया। मगर जल्दबाजी में गलत एफआईआर दर्ज कर ली गई। केस दर्ज कराने वाले मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) के चौंकाने वाले दावे से खुद शासन-प्रशासन सवालों के घेरे में है। उधर, चूक का खुलासा होते ही कमिश्नर सुजीत पांडेय ने आगे जांच के दौरान एफआईआर में तथ्यात्मक गड़बड़ियां दुरुस्त करने की बात कही है। दरअसल, सरोजनीनगर पुलिस ने जिस तहरीर पर केस दर्ज किया है, उसमें सीएमओ ने कहा है कि कनिका कपूर लंदन गईं थीं और वहां से 14 मार्च को लखनऊ आईं थीं। 14 मार्च को एयरपोर्ट पर कोरोना पॉजिटिव मिलने पर उन्हें होम क्वारन्टाइन में रहने के निर्देश दिए गए थे। मगर, उन्होंने निर्देशों का उल्लंघन करते हुए कई सामाजिक समारोहों में भाग लिया। इसलिए उनके खिलाफ एपेडमिक एक्ट के तहत कार्रवाई हो। पुलिस ने सीएमओ के इस दावे के आधार पर कनिका के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 188ए 269 और 270 के तहत दर्ज किया है। सीएमओ ने कहा कि 14 मार्च को कनिका आईं जबकि लखनऊ के लोगों का कहना है कि वह 11 मार्च को ही लखनऊ पहुंच गईं थीं। केस दर्ज होने पर ही जब आईएएनएस ने तहरीर देखी तो बड़ी चूक का नजर आई। सवाल यह उठा कि अगर 14 मार्च को ही कनिका कपूर कोरोना पॉजिटिव मिलीं थीं तो फिर 20 मार्च को इसका खुलासा क्यों हुआ। क्या पांच दिन तक लखनऊ प्रशासन सोता रहा। एफआईआर के तथ्यों पर घिर जाने के बाद लखनऊ के पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय ने मीडिया को जारी बयान में कहा कि कनिका 14 मार्च नहीं बल्कि 11 मार्च को आईं थीं। जो भी गड़बड़ियां हैं उन्हें सुधारा जाएगा। कमिश्नर सुजीत पांडेय ने भले ही कनिका कपूर के लखनऊ पहुंचने की तारीख में भूलसुधार की बात कही हो मगर सीएमओ का यह दावा चौंकाने वाला है कि कनिका कपूर एयरपोर्ट पर ही कोरोना पॉजिटिव पाईं गईं थीं। जबकि एयरपोर्ट के सूत्र बता रहे हैं कि वहां थर्मल स्क्रीनिंग की सुविधा भले है मगर कोरोना जांच की सुविधा नहीं। ऐसे में सीएमओ का दावा लखनऊ प्रशासन की इस महामारी से निपटने की गंभीरता की पोल खोलता है, ऐसा जानकारों का मानना है।
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