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कोविड-19 के लिए लेडी गागा का कॉन्सर्ट बेहद खूबसूरत: मिश्रा

नई दिल्ली। गायिका लीजा मिश्रा ने बताया कि कोविड-19 राहत कोष के लिए सुपरस्टार लेडी गागा के कॉन्सर्ट ‘वन वल्र्ड : टूगेदर एट होम’ में शामिल होने का अनुभव बेहद खूबसूरत रहा। उनका कहना है कि इससे उन्हें यह महसूस हुआ कि किसी समस्या से दुनिया को ठीक करने में संगीत की भूमिका कितनी अहम है।

लीजा ने इस बारे में आईएएनएस को बताया, “यह बेहद खूबसूरत रहा। स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों का उत्साहवर्धन करने के लिए आयोजित एक फ्री कॉन्सर्ट, जिसे घर पर रहकर देखा जा सकता था और इसका मकसद इन कर्मियों की सुरक्षा के लिए पैसे जुटाना था, जो सामने से आकर इस आपदा से लड़ रहे हैं।”

उन्हें इससे क्या कुछ सीखने को मिला, इस बारे में पूछे जाने पर वह कहती हैं, “इसने मुझे इस बात का एहसास कराया कि दुनिया को ठीक करने में संगीत कितना महत्वपूर्ण है। यह एक अनिश्चित समय है और दुख व बैचेनी की घड़ी में से होकर भलीभांति गुजरने के लिए संगीत के प्रति मेरा झुकाव हमेशा से ही अधिक रहा है।

मेरा यह मानना है कि बाकी दुनिया भी मेरी ही तरह महसूस करती है। लीजा ने हाल ही में अपनी पहली गैर-फिल्मी एकल गीत ‘नइ चायदा’ को जारी किया है, जो लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप के बारे में है। वीवायआरएल पर इसे मंगलवार जारी किया गया।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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