प्राजक्ता कोली संग जुड़ीं माधुरी दीक्षित - Naya India
मनोरंजन | बॉलीवुड| नया इंडिया|

प्राजक्ता कोली संग जुड़ीं माधुरी दीक्षित

मुंबई। अभिनेत्री माधुरी दीक्षित नेने ने भारतीय यूट्यूबर प्राजक्ता कोली संग अपने शौक, लॉकडाउन के दौरान उनके द्वारा सीखे गए काम सहित तमाम विषयों पर बातें कीं। अपने डेब्यू शॉर्ट फिल्म ‘ख्याली पुलाव’ को सेलिब्रेट करने के लिए प्राजक्ता, माधुरी संग जुड़ीं।

इस वीडियो का शीर्षक रखा गया ‘द हैप्पीनेस रूटीन एफटी माधुरी दीक्षित हैशटैगरियलटॉकट्यूजडे’ जिसे मंगलवार को लाइव प्रसारित किया गया और इसे अब तक दो लाख से अधिक लोगों ने देखा है।

इस सत्र में ये दोनों अपने शौक, लॉकडाउन के दौरान सीखी गई चीजें इत्यादि विषयों के बारे में बात करती नजर आईं। माधुरी ने इस दौरान यह भी बताया कि किस तरह से उन्होंने अपने पति की मदद से शूटिंग के विभिन्न उपकरणों को संचालित करना सीखा।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

});