मीरा चोपड़ा को आखिरकार मुंबई में मिला घर - Naya India
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मीरा चोपड़ा को आखिरकार मुंबई में मिला घर

मुंबई। मुंबई में दो सालों से अपने लिए घर तलाश रही अभिनेत्री मीरा चोपड़ा को आखिरकार घर मिल गया। अभिनेत्री ने लोखंडवाला में अपने लिए 3बीएचके का घर खरीदा है। इस बारे में मीरा ने कहा, “शून्य पर रहते हुए भी मुंबई के अच्छे इलाके में, शानदार इमारत और अच्छी जगह पर घर मिलना मेरे लिए काफी मायने रखता है।

घर तलाशने के दौरान मैंने महसूस किया कि इन तीनों का एक साथ मिलना बहुत मुश्किल है। इस शहर में बड़ी जगह एक बड़ा मुद्दा है, लेकिन मुझे खुशी है कि मैं इसे खोजने में कामयाब रही।” वह जल्द ही अपना नया घर शिफ्ट करने वाली हैं। वह अपने कमरे में एक बड़ा लाल रंग का बिस्तर चाहती हैं। इसके साथ ही उन्हें अपने घर में बालकनी भी चाहिए। अभिनेत्री ने हाल ही में घर खरीदा है और वह जल्द ही इसके इंटीरियर पर काम करना शुरू करने वाली हैं।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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