लोग सिनेमाघरों में फिल्में देखने के लिए उत्सुक हैं: अनिल कपूर - Naya India
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लोग सिनेमाघरों में फिल्में देखने के लिए उत्सुक हैं: अनिल कपूर

मुंबई। अभिनेता अनिल कपूर के पास 2021 में कई शैलियों के प्रोजेक्ट्स हैं और वे उम्मीद कर हैं कि आने वाला साल फिल्म बिरादरी समेत सभी के लिए अच्छा हो। फिलहाल कपूर ‘एके बनाम एके’ में अपनी भूमिका के लिए अच्छी प्रतिक्रियाएं पाने में व्यस्त हैं। यह शो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आया है और इसमें उनके सह-कलाकार अनुराग कश्यप हैं। इसे विक्रमादित्य मोटवाने ने निर्देशित किया है। कपूर ने बताया, “जब लोग आपकी फिल्म और आपके प्रदर्शन को पसंद करते हैं, तो आप अच्छा महसूस करते हैं। मुझे खुशी है कि लोगों ने फिल्म को पसंद किया।”

इंडस्ट्री के धीरे-धीरे खुलने को लेकर उन्होंने कहा, कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो केवल बड़े पर्दे के लिए बनाई जाती हैं। मेरी कुछ फिल्में इस साल रिलीज होने जा रही हैं, मुझे आशा है कि दर्शक उन्हें सिनेमाघरों में देखेंगे। मुझे यकीन है कि लोग सिनेमाघरों में फिल्में देखने के लिए उत्सुक हैं। कुछ ऐसी फिल्में हैं जो आपको बड़े पर्दे पर और ओटीटी प्लेटफार्मों पर एक जैसा आनंद देती हैं और ‘एके बनाम एके’ उन फिल्मों में से एक है।”

उन्होंने आगे कहा, “अब वैक्सीन को भी सरकार ने अप्रूव कर दिया गया है, इसलिए मैं प्रार्थना करता हूं कि थिएटर फिर से पूरी क्षमता के साथ खुलेंगे और लोग इस साल सिनेमाघरों में फिल्में देखेंगे। मैं जिंदगी को लेकर सकारात्मक सोच रखता हूं कि भगवान की मर्जी है इसलिए सब अच्छा ही होगा। मुझे पूरा भरोसा है कि साल 2021 फिल्म बिरादरी समेत सभी के लिए एक बहुत अच्छा साल होगा।”

अनिल कपूर अब करण जौहर की ऐतिहासिक ड्रामा ‘तख्त’ में, कॉमेडी ड्रामा ‘जुग जुग जियो’ और संदीप वांगा रेड्डी की क्राइम ड्रामा ‘एनिमल’ में नजर आएंगे।

By वेद प्रताप वैदिक

हिंदी के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले पत्रकार। हिंदी के लिए आंदोलन करने और अंग्रेजी के मठों और गढ़ों में उसे उसका सम्मान दिलाने, स्थापित करने वाले वाले अग्रणी पत्रकार। लेखन और अनुभव इतना व्यापक कि विचार की हिंदी पत्रकारिता के पर्याय बन गए। कन्नड़ भाषी एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने उन्हें भी हिंदी सिखाने की जिम्मेदारी डॉक्टर वैदिक ने निभाई। डॉक्टर वैदिक ने हिंदी को साहित्य, समाज और हिंदी पट्टी की राजनीति की भाषा से निकाल कर राजनय और कूटनीति की भाषा भी बनाई। ‘नई दुनिया’ इंदौर से पत्रकारिता की शुरुआत और फिर दिल्ली में ‘नवभारत टाइम्स’ से लेकर ‘भाषा’ के संपादक तक का बेमिसाल सफर।

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