कोविड-19 के प्रकोप के बीच लंदन गईं राधिका - Naya India
मनोरंजन | बॉलीवुड| नया इंडिया|

कोविड-19 के प्रकोप के बीच लंदन गईं राधिका

मुंबई। दुनियाभर में कोरोनावायरस के व्यापक प्रकोप के बीच सीमाओं पर काफी सख्ती बढ़ा दी गई है, ऐसे में बॉलीवुड अभिनेत्री राधिका आप्टे अपने पति व म्यूजिशियन बेनेडिक्ट टेलर के साथ लंदन के लिए रवाना हो गईं। राधिका ने इंस्टाग्राम पर चारों ओर फैली इस महामारी के बीच भारत से यूके के अपने इस सफर के बारे में विस्तार से बताया।

उन्होंने लिखा, “दोस्तों और सहकर्मियों ने मेरी चिंता करते हुए मुझे जितने भी संदेश भेजे हैं, उन्हें बता दूं कि मैं लंदन सुरक्षित पहुंच गई हूं। इमिग्रेशन में कोई परेशानी नहीं हुई। चूंकि यह खाली था, इसलिए उनसे (इमिग्रेशन कर्मियों) अच्छे से बातचीत हो पाई। हीथ्रो एक्सप्रेस वाकई में खाली थी और पैडिंगटन में भी मुश्किल से ही लोग दिख रहे थे।” भारत में कोरोनावायरस से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर अब तक 181 हो चुकी है और विश्व स्तर पर इसने करीब दो लाख लोगों को प्रभावित किया है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

});