वेब सीरीज की ओर आकर्षित हुए शरद मल्होत्रा - Naya India
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वेब सीरीज की ओर आकर्षित हुए शरद मल्होत्रा

मुंबई। टेलीविजन स्टार शरद मल्होत्रा डिजिटल कहानियों की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। शरद ने कहा, “इस समय वेब फलफूल रहा है और लगभग सभी (मेरे सहित) इससे जुड़े हुए हैं।

अपनी डिजिटल लघु फिल्म ‘कशमकश’ के बारे में उन्होंने कहा, सबसे पहले मुझे जिस चीज ने आकर्षित किया वह थी स्क्रिप्ट, यह एक ऐसी कहानी है जिसका अंत वैकल्पिक रूप में है। आमतौर पर किसी कहानी का एक ही अंत होता है। इसके अंत में दो नजरिए शामिल हैं, एक नजरिया जो सही होता है, दूसरा जो गलत होता है।

अब आपको यह फैसला करना है कि आप किस नजरिए से जुड़ाव महसूस करते हैं। अभिनेता ने आगे कहा, “दूसरी बात यह कि यह अनिल सर की (निर्माता अनिल वी कुमार) पहली फिल्म थी और मैं उन्हें सालों से जानता हूं।

उन्होंने मुझे ‘कसम तेरे प्यार की’ में निर्देशित किया था। कहानी का हिस्सा बनना अच्छा है जो संदेश देने की कोशिश करता है लेकिन उपदेशात्मक तरीके से नहीं। हमने वास्तविक लोगों के साथ वास्तविक स्थानों पर कहानियों को शूट किया है। यह एक आम कहानी नहीं है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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