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अहमद पटेल और आगे असर 

अहमद पटेल को जैसे भी हो हराने की ग्रांड स्कीम विधानसभा चुनाव का हिसाब लगा कर बनी थी। इसलिए की वहां कांग्रेस का चुनाव प्रबंधन अहमद पटेल से ही होना है। अमित शाह यदि अहमद पटेल को हरा देते तो प्रदेश के हिंदूओं में जहां हिंदू बनाम मुस्लिम की लड़ाई का नजरिया पैंठता वहीं कांग्रेस का सेनापति हारा हुआ दिखता और कांग्रेसी सेना में भगदड़ बनती। कांग्रेसियों में चुनाव लड़ने का तब भला मनोबल क्या रहता?  मतलब लड़ाई से पहले ही सरेंडर!

इस बिसात में मोदी-शाह ने शंकरसिंह वाघेला और राजपूत समधी को राज्यसभा उम्मीदवार बना कर हिसाब लगाया कि इससे भाजपा के प्रति क्षत्रिय वोटों में पोजिटिव मैसेज बनेगा। मतलब कांग्रेस 1998 से पहले खाम (क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी, मुस्लिम) का जो समीकरण बना कर चुनाव लड़ती थी उसका शेड़ो भी कांग्रेस नहीं बना सकेगी। शंकरसिंह वाघेला कहने को ही सही क्षत्रिय नेता का जुमला लिए हुए है। इसलिए उन्हे और उनके साथ राजपूत नेताओं को तोड़ने की अमित शाह की रणनीति क्षत्रिय वोटों में मैसेज का मतलब लिए हुए थी। यदि राज्यसभा चुनाव में राजपूत जीत जाता तो शंकरसिंह वाघेला उन्हंे ले कर भाजपा के लिए घूमते और जात के वोट पटते।  

वह प्लानिग फुस्स हुई। भाजपा को कई नुकसान हुए। अहमद पटेल की जीत के बाद आप पार्टी नेताओं के जो ट्वीट हुए है उसका अर्थ है कि अरविंद केजरीवाल एंड पार्टी गुजरात में चुनाव लड़ कर विपक्ष के वोट नहीं कटने देगी। चुपचाप कांग्रेस का समर्थन करेगी। हार्दिक पटेल, एससी-एसटी के बने मोर्चे की भी ताकत कांग्रेस के लिए लगेगी। उधर एनसीपी और जनता दल यू की वोट कटवा राजनीति के एक्सपोज होने से अब न कांग्रेस को इनसे एलायंस की जरूरत है और न ये इसके लिए विपक्षी एकता के नाम पर कांग्रेस पर ठीकरा फोड़ सकते हैं। कांग्रेस को इससे भी बडा फायदा यह हुआ कि चुनाव से ऐन पहले उसके दलबदलू, आगे के भीतरघाती बाहर हो गए। आदिवासी बहुल इलाके में बाढ़ और वहां राहुल गांधी की गाड़ी पर पत्थर फेंकने की घटना भी चख-चख का बहाना बनी है। 

पर भाजपा के लिए भी फायदे की एक बात हुई है। वह रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना है। गुजरात के दलितों में कोली अच्छी संख्या में है। देखने वाली बात यह है कि कोविंद की वजह से ये वोट कांग्रेस से कितने छिंटकते है और पटेलों के बिदके होने के नुकसान की भरपाई करा पाते है या नहीं? सो आश्चर्य नहीं होगा यदि चुनाव से पहले रामनाथ कोविंद के गुजरात में प्रोग्राम बने। 

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