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अरविंद केजरीवाल की गठबंधन कोशिश!

कांग्रेस के घास नहीं डालने और कांग्रेस के दबाव में तमाम सेकुलर नेताओं की अनदेखी झेल रहे अरविंद केजरीवाल अपना एक गठबंधन बनाने पर विचार कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी के जानकार नेताओं का कहना है कि वे ऐसे प्रादेशिक क्षत्रपों से संपर्क कर रहे हैं, जो कांग्रेस या भाजपा किसी गठबंधन के साथ नहीं हैं। आप नेताओं के मुताबिक ऐसे क्षत्रपों की बड़ी संख्या है। हां, यह अलग बात है कि उनकी राजनीतिक हैसियत बड़ी नहीं है, पर वे एक साथ आने पर ताकत बन सकते हैं। 

जैसे पिछले दिनों अरविंद केजरीवाल ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड विकास मोर्चा के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी से मिले। दोनों के बीच चाय पर लंबी चर्चा हुई। मरांडी इस समय विपक्षी गठबंधन के साथ हैं और कांग्रेस से तालमेल की उनकी बातचीत चल रही है। पर कांग्रेस इस बात को लेकर दुविधा में है कि वह सोरेन पिता पुत्र की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ तालमेल करे या मरांडी की पार्टी के साथ। इन दोनों को साथ लाने की भी योजना पर काम हो रहा है। पर इस कारण तालमेल अटका है। अगर कांग्रेस जल्दी फैसला नहीं करती है तो मरांडी आम आदमी पार्टी को झारखंड ले जाने की योजना पर आगे बढ़ेंगे। 

केजरीवाल का अगला लक्ष्य वामपंथी मोर्चे की पार्टियों को साथ लाने और ओड़िशा में नवीन पटनायक की पार्टी के साथ तालमेल की बातचीत करने की है। ममता बनर्जी के कांग्रेस के साथ तालमेल की चर्चा शुरू होने के बाद से ही लग रहा था कि कांग्रेस और सीपीएम का तालमेल टूटेगा। पिछले दिनों प्रकाश करात ने दो टूक अंदाज में कह दिया कि कांग्रेस के गठबंधन में सीपीएम भागीदार नहीं होगी। इसके बाद से ही आप और सीपीएम के बीच बातचीत की अटकलें शुरू हो गई हैं। 

इस योजने के रास्ते में एक दिक्कत यह है कि केजरीवाल को ईमानदार छवि वाले प्रादेशिक क्षत्रप नहीं मिल रहे हैं। ज्यादातर प्रादेशिक नेता ऐसे हैं, जिनके ऊपर किसी न किसी तरह के आरोप लगे हैं। अगर केजरीवाल आरोपी नेताओं के साथ तालमेल करेंगे तो उनका अपना ब्रांड खराब होगा। तभी जब पिछले दिनों राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी यादव से उनके मिलने की खबरें आईं तो उनके कई समर्थक और पार्टी छोड़ कर चले गए नेता नाराज हुए। योगेंद्र यादव ने ट्विट करके इस पर सवाल उठाए और कुमार विश्वास ने कहा कि उनके होते आप का तालमेल राजद के साथ नहीं हो सकता है। हो सकता है कि केजरीवाल की तेजस्वी के साथ तालमेल की बात नहीं हुई हो, पर इसे लेकर जो विवाद हुए हैं, उससे यह भी जाहिर हुआ है कि केजरीवाल को गठबंधन के साथ तलाशने में मुश्किल होगी। 

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