Loading... Please wait...

बिहार में सहयोगियों से दबेगी भाजपा?

अगले आम चुनाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सबसे पहले बिहार में संकट प्रबंधन किया था। राजद और जनता दल यू का गठबंधन तुड़वा कर नीतीश कुमार को वापस एनडीए में लाने के लिए बड़ी मशक्कत की गई। लालू प्रसाद के 10-12 साल पुराने मामले खोले गए, गड़े मुर्दे उखाड़े गए, भ्रष्टाचार के नए मामले बनाए गए और पूरे परिवार को उसमें लपेट कर नीतीश कुमार के लिए यह माहौल बनाया गया कि वे गठबंधन से अलग हो जाएं। 

इतना सब कुछ करने के बाद भाजपा पूरे भरोसे में थी कि अब बिहार में उसका पक्का समीकरण बन गया है। वहां 2015 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा की जो चादर फटी थी, उसमें छोटे छोटे पैबंद लगाने की बजाय भाजपा ने नीतीश कुमार के रूप में एक बड़ा पैबंद लगा लिया था। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि उसके बड़े और छोटे सारे पैबंद उखड़ने लगे हैं। भाजपा ने इतनी मेहनत करके जो सिलाई की थी वह खुलने लगी है। 

शुरुआत तो पूर्व मुख्यमंत्री और दलित नेता जीतन राम मांझी ने ही कर दी थी। वे दो साल तक भाजपा के साथ रहे और जब कुछ हाथ नहीं लगा तो वे एनडीए छोड़ कर अलग हो गए। अब वे  राजद और कांग्रेस गठबंधन में शामिल हैं। उन्होंने जहानाबाद विधानसभा सीट पर उपचुनाव से ठीक पहले एनडीए छोड़ा था और इस सीट पर भारी अंतर से राजद की जीत सुनिश्चित की थी। मांझी के बाद ऐसा लग रहा है कि अब उपेंद्र कुशवाहा की बारी है। कुशवाहा अपने तेवर दिखा रहे हैं। 

पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उनको तीन सीटें दी थीं और उनकी पार्टी तीनों पर जीती। लेकिन विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी 23 सीटों पर लड़ कर सिर्फ दो सीट जीत पाई। लालू प्रसाद जब इलाज के लिए दिल्ली आए तो कुशवाहा उनसे मिलने एम्स गए और अब तक तेजस्वी यादव ने उनको खुला प्रस्ताव दे दिया है कि वे राजद गठबंधन में शामिल हों। फिलहाल वे दोनों तरफ के विकल्प तौल रहे हैं। उनको इस बात का इंतजार है कि नीतीश कुमार क्या फैसला करते हैं। ऐसा लग रहा है कि जिधर नीतीश रहेंगे वे उधर नहीं रहेंगे। 

भाजपा को सबसे बड़ा झटका नीतीश कुमार ने दिया है। उनकी पार्टी ने पिछले दिनों एक अजीबोगरीब मांग रखी और कहा कि लोकसभा चुनाव में बिहार में एनडीए को नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़ना होगा। सवाल है कि जब नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिए देश भर में वोट मांगा जाएगा तो बिहार में नीतीश कुमार के नाम पर वोट क्यों मांगा जाएगा? यहीं सवाल उपेंद्र कुशवाहा ने उठाया है। नीतीश और कुशवाहा दोनों का पुराना विवाद इसी बहाने सामने आ गया है। 

जदयू नेताओं ने दूसरी मांग पुराने फार्मूले को लागू करने की रख दी है। यानी पहले की तरह जदयू 25 और भाजपा 15 सीटों पर लड़े। दूसरे सहयोगी रामविलास पासवान के भाई पशुपति पारस ने कह दिया कि उनकी पार्टी अपनी पुरानी सीटों पर कोई समझौता नहीं करेगी। यानी उनको अपने हिस्से की सात सीटें चाहिए। इसी तरह कुशवाहा कम से कम तीन सीट की मांग पर अड़े हैं। अगर सहयोगी पार्टियां अपनी मांग पर अड़ी रहीं तो भाजपा के हिस्से में सिर्फ पांच सीटें मिलेंगी, जबकि अभी उसके 22 सांसद हैं। 

गठबंधन बचाए रखने के लिए बिहार में एनडीए का एक महाभोज रखा गया, जिसमें अमित शाह नहीं गए और उपेंद्र कुशवाहा ने भी उसका बहिष्कार किया। इस बीच गठबंधन बचाने का एक फार्मूला 15-15-7-3 सीटों का रखा गया है। यानी भाजपा और जदयू दोनों 15-15 सीटों पर लड़ें और पासवान की पार्टी को सात व कुशवाहा की पार्टी को तीन सीट दी जाए। इसमें एक दो सीटें ऊपर नीचे हो सकती हैं। संभव है कि पासवान और कुशवाहा की पार्टी को एक-एक सीट कम मिले क्योंकि कुशवाहा की पार्टी के नाराज सांसद अरुण कुमार अपनी अलग पार्टी बना रहे हैं और बताया जा रहा है कि अमित शाह उनको भी एनडीए में ही रखना चाहते हैं। सो, कुशवाहा के कोटे की एक सीट उनको मिल सकती है। यह भी चर्चा है कि बिहार भाजपा के नेता पप्पू यादव को भी अपने साथ रखना चाहते हैं। 

जो भी हो सीटों का कोई भी फार्मूला बनेगा तो भाजपा को अपने आधा दर्जन जीती हुई सीटों की कुर्बानी देनी होगी। भाजपा के नेताओं को अंदाजा है कि उसके मौजूदा सहयोगियों में से कोई भी निकल कर दूसरी तरफ गया तो पाला पलट जाएगा। चूंकि दूसरी तरफ पहले से राजद, कांग्रेस और मांझी की पार्टी हम का गठबंधन है। इधर से कुशवाहा या पासवान या नीतीश में से कोई एक भी निकला तो बाजी पलट सकती है। भाजपा को यह भी चिंता है कि अगर नीतीश अलग होकर तीसरा मोर्चा बनाएं और चुनाव लड़ें तब भी बाजी राजद, कांग्रेस, हम गठबंधन की ओर झुक सकती है। तभी ऐसा लग रहा है कि जिस राज्य में भाजपा ने सबसे पहले संकट प्रबंधन शुरू किया था वहीं सबसे पहले संकट की शुरुआत हुई है। 

549 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2018 ANF Foundation
Maintained by Quantumsoftech