Loading... Please wait...

भाजपा फंसी तभी उद्धव की मिन्नत

भाजपा के यदि 2014 जैसे अच्छे दिन होते तो क्या अमित शाह उन उद्धव ठाकरे के घर जाते जिन्हे 2014 के विधानसभा चुनाव में ठेंगा दिखाया था? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए 2019 में 270 सीटे आ सकना कितना मुश्किल है इसका नंबर एक प्रमाण शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे के आगे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का गिड़गिड़ाना है। अकेला यह तथ्य प्रमाण है कि 2014 की मोदी की छप्पर फाड़ मलमल अब बुरी तरह फटी है। उसमें अमित शाह पैबंद लगाने, थेगलिया लगाने के लिए इधर-उधर भटक रहे हंै। वह 2014 का वक्त था और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव होने थे। अमित शाह अध्यक्ष बन कमान संभाल चुके थे। तब अमित शाह ने सीधे मुंह तो क्या टेढ़े मुंह भी उद्धव ठाकरे से बात नहीं की। नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने उद्धव ठाकरे के फोन भी नहीं उठाए। शिवसेना हमेशा की तरह भाजपा से एलायंस चाहती थी लेकिन मोदी-शाह ने लोकसभा चुनाव में छप्पर फाड़ जीत के घमंड में शिवसेना को खत्म करने का वक्त आया माना और उद्धव ठाकरे को अंगूठा दिखाया। एलायंस नहीं किया। अपने को ध्यान है तब का यह किस्सा कि चुनाव को ले कर भाजपा की संसदीय बोर्ड की जब बैठक हुई तो मोदी-शाह को सुषमा स्वराज आदि नेताओं ने बताया कि उद्धव ठाकरे बार-बार फोन कर रहे हैं। उन्हे क्या जवाब दंे? तब अमित शाह ने दो टूक शब्दों में कहा- आप क्यों उनसे बात कर रहे हंै? उन्हे बता दीजिए अमित शाह ही सब तय करेंगे। उनका फोन नहीं उठाएं। 

हां, अहंकार- घमंड और शिवसेना को खत्म करने, औकात दिखा देने का वह वक्त और इस सप्ताह उन्ही अमित शाह का उद्धव ठाकरे के घर जा कर मनाना प्रमाण है कि महाराष्ट्र में अब भाजपा पूरी तरह शिवसेना पर निर्भर है। शिवसेना और उद्धव ठाकरे के नारायण राणे जैसे तमाम दुश्मनों को, कांग्रेसियों-शिव सैनिकों को अमित शाह ने भाजपा में वहां यों लिया है लेकिन यदि शिवसेना अलग चुनाव लड़ी तो भाजपा को लोकसभा चुनाव में पांच सीटंे नहीं मिलेगी। 2014 में लोकसभा की 48 सीटों मे से 43 सीटे जीतने का शिवसेना-भाजपा ने जो चमत्कार दिखाया था उसकी एक-चौथाई जीत भी 2019 में नहीं होगी। 

सोचें, पालगांव उपचुनाव जीतने के बाद देवेंद्र फड़नवीस-भाजपा ने शिवसेना को औकात दिखाते हुए कैसे जीत का वी साइन दिखलाया था लेकिन उस पर ये दस दिन टिके नहीं रहे। अमित शाह बाकायदा उद्धव ठाकरे के घर गए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को बाहर बैठाए रखा और दो घंटे अकेले में ठाकरे से मिन्नत की।

सो यह तथ्य प्रतीक है कि 2014 का टाट किस कदर फट चुका है। सोचंे, यदि जनता में नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के काम की धूम होती तो पूरे देश में फटे पर थेगलिया लगाने के लिए अमित शाह ऐसी भागदौड़ क्या कर रहे होते? 

तय माने कि उद्धव ठाकरे हो या नीतिश कुमार या रामविलास पासवान या अकाली दल सब आगे के दस महीनों में मोदी-शाह से न केवल कीमत वसूल करेंगे बल्कि इस बात को भी नोट करके रखें कि ये सभी न केवल एलायंस में सीटों का अपना कोटा बढ़वाएंगे बल्कि उद्धव ठाकरे हो या नीतिश कुमार सब यह सोच कर चुनाव लड़ेंगे कि अप्रैल 2019 में नरेंद्र मोदी को कतई प्रधानमंत्री नहीं बनने देना है। उद्धव ठाकरे अपने उम्मीदवारों को जीतवाने के लिए मोदी-शाह की रैलियां नहीं करवाएंगे। ये नरम-गरम रह कर जनता में हवा बनाएंगे कि मोदी सरकार की बरबादी के बावजूद उन्हे वोट दो क्योंकि वे सच्चे हैं। शिवसेना सच्ची हिंदूवादी है। शिवसेना पूरे देश में उम्मीदवार खड़े करेगी और उद्धव ठाकरे आखिर तक मोदी-शाह को छकाने के लिए आलोचना करते रहेंगे।

मतलब अमित शाह एलायंस में थेगलिया लगाने के लिए कुछ भी करें, जनता देखेगी-समझेगी कि उद्धव ठाकरे, नीतिश कुमार, रामविलास पासवान, उपेंद्र कुशवाह या राजभर, अनुप्रिया पटेल सब अपनी राजनीति कर रहे हैं। नरेंद्र मोदी अब इन पर निर्भर हैं न कि ये अब मोदी के जादू से वोट की उम्मीद में हैं।

लाख टके का सवाल है कि मोदी-शाह अगले आम चुनाव में उद्धव ठाकरे, नीतिश कुमार,, रामविलास पासवान से ले कर नारायण राणे या किरौडीलाल मीणा से ले कर मुकुल रॉय आदि को कितनी सीटे देंगे और ये नेता त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में क्या नरेंद्र मोदी को वापिस प्रधानमंत्री बनवाने के अंध समर्थक होंगे? खास कर उस स्थिति में जब भाजपा दो सौ –सवा दो सौ सीट पर अटकी? तब उद्धव ठाकरे, नीतिश कुमार मोदी-शाह की टाट के पैबंद बनंेगे या टाट को पूरी तरह फाड़ने का सुख, मजा और बदला लेंगे? 

पाठक माई बाप, जवाब आप खुद सोचंे। फिलहाल तो उद्धव ठाकरे हो या नीतिश कुमार सभी की इस मनोदशा का मजा लीजिए कि अब इनकी मोदी-शाह ललो चप्पों कर रहे हैं जो कल तक टके भाव थे!

756 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2016 nayaindia digital pvt.ltd.
Maintained by Netleon Technologies Pvt Ltd