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गुजरात में मोदी की भावनात्मक अपील!

हरि शंकर व्यास
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात में सारे चुनावी दांव से ऊपर भावनात्मक अपील का दांव आजमा रहे हैं। पार्टी के नेता इस समय डोर टू जोर कैंपेन कर रहे हैं और वे साथ साथ एक पन्ने की एक अपील भी लोगों को दे रहे हैं। यह अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है। उन्होंने इसमें कहा है कि गुजरात उनकी आत्मा है और देश परमात्मा है। यानी आत्मा से परमात्मा के मिलन के जरूरी है कि वे गुजरात जीतें। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री अगले एक महीने में इस तरह की और भी भावनात्मक अपील कर सकते हैं और निजी तौर पर लोगों से जुड़ने का प्रयास कर सकते हैं।

पिछले दिनों उन्होंने फोन करके गोपाल गोहिल नाम के एक छोटे से कारोबारी और पार्टी के पुराने कार्यकर्ता से बात की थी। पार्टी के नेताओं का आकलन है कि इसका जमीनी स्तर पर बड़ा असर हुआ। पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं में यह भाव पैदा हुआ कि दिल्ली जाकर भी मोदी उनको याद रखे हुए हैं और उनकी कद्र करते हैं। सो, आगे ऐसा और प्रयास हो सकता है। यह भी प्रचार जमीनी स्तर पर हो रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के कारोबारियों का ध्यान रख कर ही जीएसटी में इतने बड़े बदलाव कराए हैं। 

भाजपा के जानकार नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी अगली गुजरात यात्रा में जीएसटी के ताजा बदलावों पर फोकस करेंगे और गुजरात के लोगों को बताएंगे कि वे उनका कितना ख्याल रखते हैं। गुजराती गौरव और गुजराती अस्मिता का प्रचार तो वे पहले दिन से कर रहे हैं। उन्होंने कई बार प्रचार में कहा है कि दिल्ली के लोगों या नेहरू गांधी परिवार ने गुजरातियों को अपमानित किया है। सरदार वल्लभ भाई पटेल से लेकर मोरारजी देसाई की मिसाल देकर उन्होंने लोगों को यह बात बताई है। सो, भाजपा यह प्रचार कर रही है कि नरेंद्र मोदी को भी हटाने के वैसे ही प्रयास हो रहे हैं और अगर गुजरात ने उनको ताकत नहीं दी तो दिल्ली की सत्ता उनके हाथ से निकल जाएगी। 

इसी तरह उन्होंने कांग्रेस की ओर से बनाए जा रहे सामाजिक समीकरण को जातिवादी गठजोड़ का नाम देकर लोगों से भावुक अपील की है कि वे जातिवाद की बजाय विकास पर ध्यान दें। हालांकि अब तक भाजपा खुद भी जाति के समीकरण बना कर चुनाव जीतती रही है। पर चूंकि अब कांग्रेस का जातीय समीकरण कम से कम कागज पर मजबूत दिखने लगा है तो भाजपा बड़े समीकरण की बात करने लगी है। जाति की काट हिंदुत्व का दांव हो सकता है या विकास का। प्रधानमंत्री दोनों दांव आजमाएंगे।  

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