फिर सुरक्षा व शहरी नक्सली का हल्ला

भाजपा की राजनीति और चुनावी विमर्श में राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा बड़ा मुद्दा रहा है। भाजपा का दावा है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा का ध्यान रखने वाली पार्टी है, जबकि दूसरी पार्टियां राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करती हैं। राफेल विमान सौदे को लेकर चल रहे विवाद में भी भाजपा ने कांग्रेस को इसी आधार पर कठघरे में खड़ा किया है कि उसने बरसों तक राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ किया और अब भी सौदे पर सवाल उठा कर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रही है और सैनिकों का मनोबल कमजोर कर रही है। 

बहरहाल, अगले चार महीने यानी लोकसभा चुनाव शुरू होने तक राष्ट्रीय सुरक्षा का बड़ा नैरेटिव बनेगा। जैसे अभी राष्ट्रीय जांच एजेंसी, एनआईए ने एक दर्जन संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है। एनआईए, दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा और उत्तर प्रदेश की आतंकवाद निरोधक शाखा, एटीएस ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में करीब 20 जगहों पर छापे मारे और एक दर्जन से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया। इनमें से से दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है और एनआईए की हिरासत में उनसे पूछताछ चल रही है। 

एनआईए का दावा है कि ये संदिग्ध आतंकवादी इस्लामिक स्टेट से प्रभावित हैं और उसी से जुड़ा इनका मॉड्यूल है। यह भी दावा किया जा रहा है कि ये आतंकवादी एनआईए की बिल्डिंग उड़ाना चाहते थे और आरएसएस मुख्यालय भी उनके निशाने पर था। ध्यान रहे एनआईए ही वह एजेंसी है, जो आतंकवादियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई का काम कर रही है। जम्मू कश्मीर में भी एनआईए ने ही अलगाववादियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर जांच शुरू की है। आतंकवादियों को होने वाली फंडिंग की जांच एनआईए ने करके सबके खाते वगैरह पकड़े हैं। उनको फंडिंग करने वाले कारोबारियों पर भी एनआईए ने ही नकेल कसी है और दिल्ली में भी लोगों को पकड़ा है। एक तरह से एनआईए आतंकवादियों और अलगाववादियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाली केंद्रीय एजेंसी बनी है। तभी अगर पकड़े गए संदिग्ध आतंकवादी यह कह रहे हैं कि वे एनआईए की बिल्डिंग उड़ाना चाहते हैं तो इससे राष्ट्रीय सुरक्षा का नैरेटिव बनाने में मदद मिलेगी। 

उनके खिलाफ कार्रवाई का बड़ा मैसेज जाएगा। यह संभव है कि आगे इस तरह की और भी कार्रवाई हो, संदिग्ध आतंकवादी पकड़े जाएं और उनके यहां से बरामद होने वाले हथियारों की प्रदर्शनी लगेगी। मीडिया में इसका हल्ला मचेगा। 

राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने कुछ दिन पहले शहरी नक्सली का नैरेटिव भी बनाया था। पिछले साल भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा के बाद देश भर में छापे मार कर कर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, जिनके बारे में यह प्रचार हुआ कि ये जंगल में बैठे नक्सलियों के समर्थक हैं और देश के लिए खतरा हैं। मीडिया में भाजपा ने शहरी नक्सलवाद के इस नैरेटिव को हवा दी। इन कथित शहरी नक्सलियों में से एक के पास एक लेटर बरामद होने की खबर आई, जिसमें कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने की बात कही गई थी। गुजरात में भी अक्सर चुनाव से पहले आतंकवादी पकड़े जाते थे या मुठभेड़ में मारे जाते थे, जिनके बारे में बाद में पता चलता था कि वे तब के राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जान से मारने के लिए आए हुए होते थे। पिछले करीब पांच साल में गुजरात के मुख्यमंत्री की जान को कोई खतरा नही पैदा हुआ है। बहरहाल, सरकार ने शहरी नक्सली के नाम पर देश के कई प्रतिष्ठित सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को जेल में बंद किया है। भाजपा ने पिछले साढ़े चार साल में देश के कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं की भी ऐसी ही ब्रांडिंग की है और उनको देश तोड़ने वाले गैंग का हिस्सा बनाया है। अगले चार महीने राष्ट्रीय सुरक्षा और शहरी नक्सली का विमर्श भी बनाया जाता रहेगा।

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