Loading... Please wait...

भाजपा के लिए दक्षिण भारत में कहां है पैबंद?

भारतीय जनता पार्टी दक्षिण भारत में पैर फैलाने का प्रयास कर रही है। पर उसकी चादर उतनी बड़ी नहीं है कि उसमें उसका पैर आए। सो, उसने छोटे छोटे कई पैबंद लगा कर अपनी चादर लंबी करने का प्रयास किया। आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की वजह से उसे कुछ सफलता भी मिली पर अब वे भी एनडीए से अलग हो गए हैं। तमिलनाडु में भाजपा ने पिछली बार कई छोटी पार्टियों को मिला कर गठबंधन बनाया था पर सबका सफाया हो गया। राज्य की सारी 39 लोकसभा सीटें अन्ना डीएमके के खाते में चली गईं। इसी तरह भाजपा ने केरल में बीडीजेएस नाम की छोटी पार्टी के साथ तालमेल किया पर वहां भी कोई कामयाबी नहीं मिली। 

सो, जब उत्तर भारत में भाजपा को अपनी सीटें खतरे में दिख रही हैं तो उसे दक्षिण भारत में अपना विस्तार करने की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस हो रही है। तभी वह दक्षिण भारत में नई पार्टियों के साथ तालमेल के प्रयास में है। उसे भ्रष्टाचार का प्रतीक बने जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के साथ भी तालमेल करने में दिक्कत नहीं है। राष्ट्रपति चुनाव से पहले जगन मोहन ने प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और बाद में भाजपा के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन दिया था। प्रदेश भाजपा के नेताओं ने जगन के प्रति सद्भाव दिखाया इसलिए चंद्रबाबू नायडू ने आक्रामक हुए। जगन के अलावा कांग्रेस के नेता चिरंजीवी के भाई और फिल्म अभिनेता पवन कल्याण की जन सेना के साथ भी भाजपा तालमेल की संभावना तलाश रही है। 

तमिलनाडु में भाजपा के नेता चाहते हैं कि किसी तरह से अन्ना डीएमके से तालमेल हो जाए। अन्ना डीएमके के दोनों खेमे यानी मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी और उप मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम के खेमे भाजपा का समर्थन कर रहे हैं। दोनों को साथ लाने में प्रधानमंत्री मोदी की बड़ी भूमिका रही है। इनके अलावा भाजपा का दूसरा विकल्प रजनीकांत हैं, जिन्होंने राजनीति में उतरने का ऐलान किया है। भाजपा उनके साथ तालमेल कर सकती है या उनको अपनी पार्टी में ला सकती है। भाजपा का तीसरा विकल्प अपनी पुरानी सहयोगी पार्टियों एमडीएमके, पीएमके आदि के साथ तालमेल करने का है।

केरल में नारायण गुरू के विचारों का प्रसार करने के लिए बने संगठन नारायण धर्म परिपालना योगम, एसएनडीपी के महासचिव वेल्लापल्ली नतेसन ने भारत धर्म जन सेना, बीडीजेएस नाम से एक पार्टी बनाई है। भाजपा ने पहले भी इस पार्टी के साथ तालमेल किया था। अगले चुनाव के लिए भाजपा फिर इसके साथ तालमेल करेगी। उससे पहले पार्टी ने मलयाली अभिनेता सुरेश गोपी को राज्यसभा में भेजा है और राज्य के अपने इकलौते बड़े नेता के राजशेखरन को मिजोरम का राज्यपाल नियुक्त किया है। इन छोटे छोटे उपायों से भाजपा आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में पैर जमाना चाहती है।

कर्नाटक में जरूर भाजपा की स्थिति अच्छी है पर कांग्रेस और जेडीएस के बीच तालमेल हो जाने से क्या स्थिति रहेगी इसका अभी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। गौरतलब है कि राज्य में जेडीएस के नेतृत्व में कांग्रेस समर्थित सरकार बनने के बाद दोनों पार्टियों ने अगला लोकसभा चुनाव मिल कर लड़ने का फैसला किया है। इनके साथ लड़ने से समीकरण पहले जैसा नहीं रह जाएगा। तेलंगाना में भाजपा के पास कोई गठबंधन सहयोगी नहीं है। उसे अकेले ही लड़ना है। वहां चंद्रशेखर राव की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति, कांग्रेस और ओवैसी की पार्टी एमआईएम की चुनौती है। आंध्र प्रदेश की दोनों बड़ी पार्टियां टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस भी किस्मत आजमाने उतरेंगी। भाजपा आंध्र प्रदेश में जिसके साथ तालमेल करेगी उसके साथ ही तेलंगाना में भी उसका तालमेल रहेगा पर उससे कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि आंध्र की पार्टियों का असर दो, तीन सीटों से ज्यादा पर नहीं है।

563 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2018 ANF Foundation
Maintained by Quantumsoftech