फेंकू योजनाओं का कैसे पहुंचेगा लाभ?

वित्त मंत्री ने अंतरिम बजट में कई घोषणाएं की है?  सवाल है कि सरकार की घोषित योजनाओं का लाभ लोगों तक कैसे पहुंचेगा? सरकार जिन लोगों को लाभ देना चाहती है क्या उनकी सूची सरकार के पास है? अगर नहीं है तो वह सूची बनाने में कितना समय लगेगा? क्या ऐसा हो सकता है कि चुनाव की घोषणा के बाद सरकार की ओर से लोगों के खाते में पैसे डालने का काम शुरू हो? अगर ऐसा होता है तो क्या यह सीधे वोट के लिए लोगों को पैसे देना नहीं होगा? ऐसे कई सवाल हैं, जिनका जवाब अभी समझ में नहीं आ रहा है। पर सबसे पहले यह देखने की जरूरत है कि चुनाव से पहले लोगों के खाते में पैसे डालने वाली योजनाओं या आय कर छूट का कैसे फायदा होगा? 

केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को तीन हजार रुपए पेंशन देने की योजना घोषित की है। इस योजना के तहत 15 हजार रुपए से कम मासिक आमदनी वाले मजदूरों को 60 साल की उम्र के बाद पेंशन मिलेगी। सबसे पहले तो यह समझना होगा कि किसी भी व्यक्ति को इस योजना का तत्काल लाभ नहीं मिलने वाला है। दूसरे, इसमें शामिल होने वाले मजदूर को एक निश्चित रकम अपने पास से भी निवेश करनी होगी। 

बजट दस्तावेजों के मुताबिक अगर कोई 18 साल का व्यक्ति इसका हिस्सा बनता है तो 60 साल की उम्र तक उसे हर महीने 55 रुपए देने होंगे। सरकार अपनी ओर से इसमें 55 रुपए मिला कर जमा करेगी। जब वह व्यक्ति 60 साल का होगा यानी आज से 42 साल बाद यानी 2061 में सरकार उसको तीन हजार रुपए महीना देगी। जरा सोचें, 2061 में तीन हजार रुपए की कीमत क्या रहेगी? कुछ आर्थिक जानकारों का कहना है कि पिछले दस साल की मुद्रास्फीति के औसत से देखें तो उस समय तक इसकी कीमत पांच सौ रुपए के बराबर हो जाएगी। बहरहाल, अगर कोई 29 साल का व्यक्ति इस योजना में शामिल होता है तो उसे हर महीने सौ रुपए देने होंगे और सरकार सौ रुपए मिला कर जमा करेगी। उसे भी 31 साल बाद 2050 में तीन हजार रुपए की पेंशन मिलेगी। अभी फिलहाल तो सरकार को ऐसे लोगों की सूची बनानी होगी क्योंकि ऐसा कोई डाटा बेस नहीं है, जिससे पता चले कि 15 हजार रुपए या उससे कम मासिक कमाई वाले कितने मजदूर देश में हैं। 

इसी तरह सरकार ने आय कर छूट की बड़ी बड़ी घोषणाएं कर दीं। पर साथ ही यह भी कह दिया कि चूंकि यह अंतरिम बजट है इसलिए सरकार कर के स्लैब को या दर को नहीं बदल रही है। सरकार ने पांच लाख रुपए तक की आय को कर से मुक्त करने का ऐलान कर दिया। पर सरकार ने जो भी बदलाव किए हैं उन्हें नई सरकार ही लागू करेगी। वित्त मंत्री ने कह कि नए वित्त वर्ष की शुरुआत में करदाताओं के लिए टैक्स रेट और छूट स्पष्ट होनी चाहिए इसलिए कर प्रस्ताव रख रहा हूं। चूंकि अप्रैल-मई में आम चुनाव होने वाले हैं इसलिए अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष में कर के पुराने स्लैब बने रहेंगे। 

अब सोचें यह कितना कंफ्यूजन का मामला है। सरकार ने जो भी ऐलान किया है क्या उसके आधार पर लोग अप्रैल से आय कर भरना शुरू कर सकते हैं या उनको जुलाई में पेश होने वाले पूर्ण बजट तक इंतजार करना होगा? निश्चित रूप से लोग इंतजार करेंगे और आय कर रिटर्न भरने की तारीखें बढ़ानी होंगी। एक कंफ्यूजन पांच लाख रुपए की छूट को लेकर भी रहा। बजट के दिन लोग दिन भर इसके कयास लगाते रहे कि पांच लाख वाली छूट सबके लिए है सिर्फ पांच लाख तक की कमाई वालों के लिए है। बजट के बाद परंपरागत प्रेस कांफ्रेंस करने पहुंचे वित्त मंत्री ने भी इसे स्पष्ट नहीं किया। अब कहा जा रहा है कि दिल्ली में जिस तरह अरविंद केजरीवाल की सरकार की बिजली सब्सिडी की योजना है वैसी ही योजना पांच लाख की छूट वाली है। दिल्ली में चार सौ यूनिट तक बिजली खपत पर 50 फीसदी की छूट मिलती है पर 401 यूनिट होते ही यह छूट खत्म हो जाती है और पूरा बिल देना होता है। उसी तरह पांच लाख की छूट पांच लाख से ऊपर की कमाई वालों के लिए नहीं है। उन्हें पुराने स्लैब के हिसाब से ही कर चुकाना होगा। 

वित्त मंत्री ने छोटे किसानों को छह हजार रुपए हर साल देने का वादा किया और कहा कि दो हजार रुपए की पहली किस्त इसी वित्त वर्ष में यानी 31 मार्च से पहले किसानों को मिल जाएगी। इस लिहाज से सरकार के पास दो महीने का समय है साढ़े 12 करोड़ खातों में दो दो हजार रुपए पहुंचा देने के लिए! क्या यह संभव है? अभी सरकार को ऐसे किसानों की सूची भी तैयार करनी होगी, जिनके पास पांच एकड़ से कम जमीनें हैं। राज्यवार सूची बनने के बाद ही सरकार उनके खातों में सीधा नकदी ट्रांसफर करेगी। अव्वल तो इसके लिए समय कम है और दूसरे यह रकम भी बहुत कम है। छह हजार रुपए साल का मतलब है कि सरकार पांच सौ रुपए हर महीने देगी। कृषि के जानकारों का मानना है कि दो हजार रुपए की किस्त से एक बार ट्रैक्टर की टंकी में डीजल पूरा नहीं भरवाया जा सकता है। केंद्र ने इस मामले में तेलंगाना सरकार की रैयतु बंधु या ओड़िशा सरकार की कलिया योजना की नकल की है। रैयतु बंधु योजना के तहत किसान को आठ हजार रुपए प्रति एकड़ हर साल मिलता है तो कलिया के तहत किसान को दस से साढ़े 12 हजार तक रुपए मिलते हैं। केंद्र सरकार की राशि इनके मुकाबले बहुत कम है।

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