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कांग्रेस संभावना वाले राज्यों में एलायंस

हरि शंकर व्यास
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कांग्रेस की संभावना वाले राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब आदि को माना जा सकता है। इन राज्यों में कांग्रेस या तो भाजपा के सीधे लड़ाई में है या उसका स्थानीय पार्टियों के साथ तालमेल है। पिछले चुनाव में इन छह राज्यों में पंजाब को छोड़ कर बाकी जगह कांग्रेस लगभग साफ हो गई थी। महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस सिर्फ दो सीट जीत पाई थी। गुजरात और राजस्थान की 46 सीटों में कांग्रेस का खाता नहीं खुला था। मध्य प्रदेश की 29 में से सिर्फ तीन सीटें इस समय कांग्रेस के पास हैं और छत्तीसगढ़ की 11 में से एक सीट कांग्रेस जीत पाई थी। पंजाब में जरूर 13 में से चार सीट कांग्रेस जीत पाई थी। तभी इन छह राज्यों की 147 सीटों में कांग्रेस को बड़ी उम्मीद है। पिछली बार 147 में से वह सिर्फ 10 सीट जीत पाई थी। 

इन छह में से कांग्रेस का भाजपा से सीधा मुकाबला गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में है। इनमें भी अगर पिछले साल गुजरात में हुए विधानसभा चुनाव को देखें तो लग रहा है कि अगर कांग्रेस ने एनसीपी, बसपा और आप के साथ तालमेल किया होता या सीटों का समझौता किया होता तो तस्वीर दूसरी होती। छोटी पार्टियों का असर भले मामूली है पर इन राज्यों में उससे बड़ा फर्क हो सकता है। सो, कांग्रेस अगर महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ तालमेल करके चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है तो उसे गुजरात में भी उसके साथ तालमेल करना चाहिए और अगर उत्तर प्रदेश में सपा, बसपा व कांग्रेस साथ आते हैं तो इसका विस्तार मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में भी होना चाहिए। बसपा का असर पंजाब में भी है और अगर कांग्रेस अपने हितों से समझौता करके बसपा के प्रति कुछ उदारता दिखाए तो उसका तालमेल उत्तर प्रदेश के बाहर उन राज्यों में भी हो सकता है, जहां कांग्रेस सीधे भाजपा से मुकाबले में है। इसका फायदा ऊपर बताए गए सभी छह राज्यों में होगा। 

महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी ने साथ मिल कर लड़ने का फैसला किया है। दूसरी ओर भाजपा और शिवसेना के बीच कम से कम अभी अलग अलग लड़ने की सोच दिखाई दे रही है। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस और एनसीपी को इसका फायदा मिल सकता है। पिछली बार भाजपा और शिवसेना गठबंधन को महाराष्ट्र की 48 में से 40 सीटें मिली थीं। इस बार कांग्रेस और एनसीपी इस संख्या को आधे पर ला सकते हैं। अगर भाजपा का साथ छोड़ रहे किसान नेता राजू शेट्टी और उनके तरह के दूसरे क्षत्रपों को भी साथ लेने का प्रयास एनसीपी और कांग्रेस करें तो तस्वीर पूरी तरह से पलट भी सकती है।

कांग्रेस को इन छह में से सबसे ज्यादा चिंता छत्तीसगढ़ की करनी है, जहां कांग्रेस के पुराने नेता अजित जोगी पार्टी बना कर चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कई सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। वे कांग्रेस की संभावना को नुकसान पहुंचा रहे हैं। भाजपा के खिलाफ पिछले 15 साल के शासन की जो एंटी इन्कंबैंसी है उसका वोट अजित जोगी काट सकते हैं। छत्तीसगढ़ में त्रिकोणात्मक लड़ाई का फायदा भाजपा को होगा। कांग्रेस के साथ सीधी लड़ाई वाले दो राज्य हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड भी हैं, जहां लोकसभा की नौ सीटें हैं। पिछली बार सारी सीटें भाजपा ने जीती थीं। 

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