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राहुल के दिन अच्छे!

हरि शंकर व्यास

मैंने बहुत पहले लिखा था कि राहुल गांधी घर बैठे रहे तब भी नेता बनेगें। कुछ महिनों पहले यह भी लिखा था कि भारत की दंतकथाओं में जंगल में खोए राजकुमार की तरह एक दिन अचानक राहुल गांधी को लोग जगंल में मिला पाएगें और जनता उन्हे सिर आंखों पर बैठा लेगी। और देखिए वही हो रहा है। और ऐसा किसकी बदौलत? नरेंद्र मोदी व अमित शाह की बदौलत!  कैसे? 

सोचे, क्या यह गजब नहीं कि जिसे सोनिया गांधी या कांग्रेसी नहीं जतला सकते थे उसे भाजपा ने पूरे देश को जतला दिया। चाहे तो इसे सोमनाथ मंदिर का राहुल को आर्शीवाद माने कि देश के हिंदुओं ने राहुल गांधी का आस्थावान हिंदू, जनेऊधारी ब्राह्यण वाला फोटो देखा। राहुल गांधी को यह कहने का मौका मिला कि उनकी दादी, वे और उनका परिवार शिवभक्त है। धर्म को वे निज जीवन का हिस्सा मानते है इसलिए कर्मकांड का दिखावा उन्हे पंसद नहीं है पर वे आस्थावान तो है।

सो जो नरम या सहज हिंदू है उसकी यह शिकायत दूर हुई कि राहुल गांधी हिंदू  नहीं है या हिंदूपना नहीं दिखाते। ध्यान रहे मैं नरेंद्र मोदी के उभार के साथ कांग्रेस के संकट में लगातार दलील देता रहा हूं कि कांग्रेस अपने को गांधी की हिंदू कांग्रेस में बदले। भारत की दोनों मुख्य पार्टिया हिंदू दिखनी चाहिए। बहुसंख्यक हिंदुओं की आबादी वाले देश की राजनीति की ये दो धाराएं वैसी ही हो जैसे अमेरिका में रिपब्लिकन, डेमोक्रेटिक या जर्मनी में क्रिश्चियन डेमोक्रेटीक या सोशल डेमोक्रेटीक है। दोनों तरफ के नेता चर्च जाते है, बाईबिल पर हाथ रखते है, ईसाई बनाम गैर-ईसाई, सॉफ्ट बनाम हार्ड राष्ट्रवाद, दक्षिणपंथ बनाम मध्यमार्ग, लिबरल का रूप लिए होते है तो भारत के लौकतंत्र में क्यों न भाजपा और कांग्रेस हिंदू राजनीति के दो रूप लिए हुए हो? 

कांग्रेस हकीकत में हिंदू पार्टी थी लेकिन वामपंथियों के असर में उसने सेकुलरवाद की मुस्लिम तुष्टीकरण वाली इमेज पाई। तभी मैं यह लिखता रहा हूं कि राहुल गांधी मंदिर जाना शुरू करें, अपने को हिंदू दिखाना शुरू करें, दिग्विजयसिंह का बोलना बंद कराए। यही कांग्रेस के लिए वक्त का तकाजा है। 

सो वक्त ने समझ बनवाई और गुजरात में राहुल गांधी मंदिर दर्शन जाने लगे। जान ले कि इस बात को पूरे देश का हिंदू गौर से देख रहा होगा। कोई माने या न माने, अपना मानना है कि जनेऊधारी ब्राह्यण के फोटो देख गुजरात और यूपी के ब्राह्यणों में भी राहुल गांधी को ले कर राय बदली होगी। कांग्रेस की सत्ता के वक्त एक मीटिंग में राहुल गांधी ने प्रदेश नेताओं की बात पर कहा था कि यूपी में ब्राह्यण नेता नहीं है तो क्या हुआ मैं हू ब्राह्यण। उस बात को तब प्रचारित नहीं किया गया था। अब जनेऊ पहने फोटो के बाद यूपी के ब्राह्यणों में अनिवार्यत सोचा जाएगा कि राहुल हिंदू और ब्राह्मण होने का गर्व दिखा रहे है तो जात राजनीति में तो वे अपने हुए! राहुल गांधी यदि ब्राह्यण बनकर यूपी में ब्राह्यण राजनीति करे तो अपने आप योगी का ठाकुर राज ब्राह्णों मंम मुद्दा बनेगा। 

उस नाते गुजरात में भाजपा के हाथों राहुल का हिंदू और ब्राह्यण होना प्रमाणित हुआ है। राहुल गांधी खुद या कांग्रेस खुद यह काम नहीं कर सकती थी। भाजपाई हल्ले के चलते वह मजबूर हुई और फोटो जारी हुए तो जंगल से निकले राजकुमार पर दोष मढने की ज्यादा गुंजाईस भी नहीं है। 

सो जो हो रहा है वह राहुल के बदले वक्त की बदौलत है। उनका मंदिर जाना भी और जनेऊधारी हिंदू ब्राह्यण का फोटो जारी होना भी!

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