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क्या कांग्रेस गलती कर रही?

हरि शंकर व्यास
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राहुल गांधी ने इस सप्ताह कुछ ज्यादा ही आक्रामकता दिखाई। लोकसभा में प्रधानमंत्री के भाषण के वक्त कांग्रेसी सांसदों का हल्ला चौंकाने वाला था तो जज लोया की मौत की जांच की मांग में राष्ट्रपति कोविंद से विपक्ष की मुलाकात में राहुल गांधी का नेतृत्व भी पंगे वाली बात है। कोई आश्चर्य नहीं कि इससे लोकसभा में प्रधानमंत्री का पूरा भाषण कांग्रेस को गरियाने वाला हुआ तो भाजपा के सांसदों के बीच अमित शाह ने भी राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। तभी सवाल है कि इतनी पंगेबाजी राहुल गांधी के लिए क्या घातक नहीं होगी? कांग्रेस के लिए यह शोभादायी नहीं जो संसद में प्रधानमंत्री राष्ट्रपति अभिभाषण पर जवाब दे और उसे सुनने के बजाय विपक्ष नारेबाजी करें। 

अपना भी मानना है कि प्रधानमंत्री के भाषण के वक्त कांग्रेस की नारेबाजी ठीक नहीं थी। लोकतंत्र, संसदीय कायदे में प्रधानमंत्री का भाषण शांति से सुना जाना चाहिए। उस नाते गुजरा सप्ताह मोदी-शाह बनाम कांग्रेस में रिश्तों का नया मोड है। राहुल गांधी ने अपनी अध्यक्षता को इस रणनीति में बांधा है कि उन्हें राजनीति सिर्फ मोदी-शाह केंद्रीत करनी है तो मोदी-शाह ने भी कांग्रेस को गरिया कर चुनावी तैयारियों की सोची है। 

लगता है राहुल गांधी की रणनीति सीधे मोदी-शाह से भिड़ कर अपनी धुरी में विपक्ष का चुंबक बनना है। गुजरात चुनाव से ले कर अब तक राहुल गांधी ने यह दिखलाया है कि उन्हें डर नहीं है। उनमें लड़ने का माद्दा है और उनके पास गंवाने को क्या है जो चिंता करें! वे भाषण में मुकाबला नहीं कर सकते है लेकिन सवाल पूछ कर यह मैसेज तो दे सकते है कि उनमें भिड़ने की हिम्मत है। 

उस नाते रॉफेल विमानों की कीमत और जज लोया की मौत पर जांच की मांग के लिए राष्ट्रपति से मिलना सीधे भिड़ने वाली राजनीति है। 

तब आगे का सवाल है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने कांग्रेस को धोने और कांग्रेस नेताओं के मामलों की जांच आदि में यदि वैसी ही आक्रामकता दिखाई तो क्या होगा? 

लड़ाई और बढ़ेगी। देश-विपक्ष में यह हवा पुख्ता होगी कि राहुल गांधी है जो बिना कोई परवाह किए नरेंद्र मोदी से लड़ रहे हैं। उस नाते अपने को लगता यह है कि लोकसभा चुनाव आते-आते विपक्ष में मोदी-शाह के विरोध को ले कर विपक्षी नेताओं में कपीटिशन बनेगा। भला ममता बनर्जी, शरद पवार, मायावती, अखिलेश यादव, लेफ्ट नेता क्यों ऐसा नेरेटिव बनने देंगे कि जिसमें सब कुछ मोदी बनाम राहुल गांधी हो।

सो राहुल गांधी लोकसभा चुनाव की तैयारी में नरेंद्र मोदी- अमित शाह के खिलाफ फोकस बना विरोधियों के बीच पहले वाले सो मीर वाला पैंतरा चले हुए हैं। 

एक हिसाब से यह राजनीति नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए भी फायदेमंद है। इन्होंने जब कांग्रेसमुक्त भारत का नारा बनाया हुआ है तो कांग्रेस का सामने रहना ठीक ही है। शरद पवार, मायावती, अखिलेश, ममता बनर्जी, नवीन पटनायक या लेफ्ट मोर्चे के पंगा न हो तो इससे भी आगे फायदे संभव है। यों भी कांग्रेस से पंगा गैर-कांग्रेसी क्षेत्रिय पार्टियों, क्षत्रपों में कांग्रेसमुक्त भारत की बात को पैंठाने वाला होता है।

सो न राहुल गांधी और कांग्रेस गलती कर रही है और न मोदी-शाह दोनों राहुल-कांग्रेस पर फोकस बना कर गलती कर रहे है। दोनों अपनी-अपनी राजनीति ठीक खेल रहे हैं। चाहे तो इसे बिना बूझी हुई नुरा कुश्ती भी कह सकते है। दो राष्ट्रीय दल अपनी राजनीति अपने हित अनुसार कर रहे है।

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