Loading... Please wait...

नोटबंदी पर विपक्ष का बिखराव!

नोटबंदी के एक साल पूरे होने और इसके फ्लॉप होने की खबरों के बीच अब भी कई प्रादेशिक क्षत्रप हैं, जिनको लग रहा है कि भले आर्थिक रूप से यह नुकसान पहुंचाने वाला फैसला हो, पर राजनीतिक रूप से फायदे वाला दांव हो सकता है। तभी ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक इसके विरोध में हुए विपक्ष के प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तो पाला बदल कर भाजपा के साथ ही चले गए हैं तो उनको स्वाभाविक रूप से इस फैसले के समर्थन में काला धन विरोधी दिवस मनाना था। एनसीपी के नेता शरद पवार, वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी और अन्ना डीएमके के सभी धड़े ऐसा सोच रहे हैं कि नोटबंदी की अपील लोगों में है। तभी इन पार्टियों ने विपक्ष के प्रदर्शन में खुल कर हिस्सा नहीं लिया।

वैसे भी नीतीश ने राजद और कांग्रेस के महागठबंध में रहते हुए नोटबंदी का समर्थन किया था। पिछले साल नवंबर में उन्होंने इसे काले धन के खिलाफ निर्णायक लड़ाई बताया। अब राजद और कांग्रेस के नेता मान रहे हैं कि वह महागठबंधन टूटने का पहला संकेत था, जिसे उस समय दोनों पार्टियों ने नहीं देखा था। असल में अपनी छवि को लेकर बेहद सजग रहे नीतीश को लग रहा है कि नोटबंदी का विरोध करने पर प्रचार हो सकता है कि उनके पास काला धन था और फिर वे भी मायावती और मुलायम या लालू प्रसाद जैसे क्षत्रपों की श्रेणी में आ जाएंगे। 

यहीं खतरा ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को भी दिख रहा है। ध्यान रहे भाजपा ने ओड़िशा में पहले ही राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। सो, मुख्यमंत्री ने नोटबंदी के विरोध में नहीं शामिल होकर अपने को पाक साफ बताने का दांव चला है। शरद पवार का मामला थोड़ा अलग है। वे अपने आप को पाक साफ नहीं बताना चाहते हैं, पर वे पक्ष और विपक्ष दोनों खेमों के साथ बातचीत की खिड़की खोले रखना चाहते हैं। इसलिए वे खुल कर विपक्ष के अभियान का हिस्सा नहीं बने हैं। वैसे उन्होंने हवा का रुख भांप कर कुछ मामलों में भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने लगे हैं। 

बहरहाल, विपक्ष में इस मसले पर पहले भी एक राय नहीं थी, तभी पिछले साल जब इसे लागू किया गया था, तब इसे रोकने का प्रयास सफल नहीं हो पाया था। नीतीश कुमार ने विपक्ष के विरोध की हवा निकाल दी थी। इसी वजह से विपक्षी पार्टियां न्यायपालिका पर भी दबाव बनाने में कामयाब नहीं हुई थी। नतीजा यह हुआ है कि नोटबंदी के एक साल बीत जाने के बाद भी सर्वोच्च अदालत में इसे दी गई चुनौती का मामला चल ही रहा है। अब पता नहीं फैसला आने से क्या होगा!

Tags: , , , , , , , , , , , ,

116 Views

बताएं अपनी राय!

हिंदी-अंग्रेजी किसी में भी अपना विचार जरूर लिखे- हम हिंदी भाषियों का लिखने-विचारने का स्वभाव छूटता जा रहा है। इसलिए कोशिश करें। आग्रह है फेसबुकट, टिवट पर भी शेयर करें और LIKE करें।

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

आगे यह भी पढ़े

सर्वाधिक पढ़ी जा रही हालिया पोस्ट

मुख मैथुन से पुरुषों में यह गंभीर बीमारी

धूम्रपान करने और कई साथियों के साथ मुख और पढ़ें...

भारत ने नहीं हटाई सेना!

सिक्किम सेक्टर में भारत, चीन और भूटान और पढ़ें...

बेटी को लेकर यमुना में कूदा पिता

उत्तर प्रदेश में हमीरपुर शहर के पत्नी और पढ़ें...

पाक सेना प्रमुख करेंगे जाधव पर फैसला!

पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय और पढ़ें...

© 2016 nayaindia digital pvt.ltd.
Maintained by Netleon Technologies Pvt Ltd