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2018 में डायरी भ्रष्टाचार!

कुछ ऐसा ही होता लगता है। 2017 ने अदालत में 2 जी जैसे कथित भ्रष्टाचार को झूठा करार दिया तो अब मोदी सरकार के लिए कांग्रेस को, विपक्ष को रगड़ने का तरीका डायरी में नाम, किसी गवाह के बयान का ही बनता है। यदि ऐसा हुआ तो तय माने कि 2018 में डायरियों के तमाम पन्ने सोशल मीडिया में जगह पाए होंगे। ध्यान रहे 2016 और 2017 में भी सुप्रीम कोर्ट तक डायरी, एंट्री पेज गए थे, 2017 में ही एक पूछताछ के हवाले सुप्रीम कोर्ट के जज पर भी कीचड़ उछला। इसलिए यदि डायरी की नई ताकत से 2018 में भ्रष्टाचार के किस्से शुरू हुए तो सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओ की डायरियों में ऐसी-ऐसी एट्रियां हल्ले में होगी कि पढ़ने-समझने वाले सभी चकित रह जाएंगे। 

अपना मानना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह 2019 के आम चुनाव की तैयारी में राहुल गांधी, शरद पवार, ममता बनर्जी, नवीन पटनायक, करूणानिधी, मायावती, अखिलेश यादव, लालू यादव आदि की पार्टियों के नेताओं के भ्रष्टाचार की सनसनी ऐसी बनवाएंगे ताकि भाजपा का यह चुनावी प्रचार तैयार हो कि हमने पांच साल बिना बदनामी के राज किया और देखों इन्होंने कैसे-कैसे घोटाले किए!  

तभी 2017 के आखिर में यह सनसनीखेज रिपोर्ट है कि ईडी याकि प्रवर्तन निदेशालय ने एक कंपनी की डायरी में दर्ज एंट्रियों के आधार पर अहमद पटेल के बेटे और दामाद का नाम धनशोधन से जुड़े मामले में पाया है। यही नहीं खुद अहमद पटेल पर शिकंजा कसने की अटकले भी मीडिया में आ रही हैं। वैसे इसका अनुमान बहुत पहले से था। अहमद पटेल को भी अंदेशा रहा होगा। दस साल राज करने के बाद सत्ता से बाहर होने और गुजरात के ही नरेंद्र मोदी और अमित शाह के दिल्ली की सत्ता संभालने के बाद से लगातार कयास रहा है कि अब निपटे अहमद पटेल।

सो हैरानी की बात है कि उस अटकल के हकीकत में बदलने में साढ़े तीन साल लगे हैं। वह भी कटुता से लड़े गए राज्यसभा चुनाव के बाद। कई लोग मान रहे हैं कि अगर अहमद पटेल राज्यसभा का चुनाव हार गए होते तो शायद वे और उनका परिवार जांच एजेंसियों के निशाने पर नहीं आता। वे न सिर्फ जीते, बल्कि अपने प्रतिद्वंदी उम्मीदवार बलवंत सिंह राजपूत को हरा कर नहीं, बल्कि सीधे अमित शाह को हरा कर, जो वहां बैठ कर खुद एक-एक वोट की निगरानी कर रहे थे। 

बहरहाल, कारण चाहे पुरानी खुन्नस हो या राज्यसभा चुनाव वाला, हकीकत है कि सरकार में अहमद पटेल, उनका बेटा फैसल पटेल और दामाद इरफान सिद्दीकी का नाम धनशोधन की जांच में है। खबर है कि गुजरात की कंपनी संदेसरा समूह के अधिकारी से प्रवर्तन निदेशालय ने पूछताछ की है। इस अधिकारी सुनील यादव ने एजेंसी को बताया है कि संदेसरा समूह के प्रमुख चेतन संदेसरा और उनके सहयोगी गगन धवन ने अहमद पटेल के दामाद इरफान सिद्दीकी को भारी मात्रा में नकदी दी। 

संदेसरा समूह के अधिकारी सुनील यादव ने ईडी से कहा है कि उसने खुद फैसल पटेल के ड्राइवर को पैसे दिए, जो उनके घर तक पहुंचाए गए। उसने अपने लिखित बयान में कहा है कि चेतन संदेसरा अक्सर दिल्ली के मदर टेरेसा क्रीसेंट पर स्थित अहमद पटेल के घर जाता था। अहमद पटेल के घर 23, मदर टेरेसा क्रीसेंट को संदेसरा समूह की डायरियों में हेडक्वार्टर्स 23 के नाम से दर्ज हुआ है। यादव ने बताया कि संदेसरा समूह में इरफान सिद्दीकी का नाम जे2 और फैसल पटेल का नाम जे1 के रूप में दर्ज है। 

पूरा मामला संदेसरा समूह की एक डायरी के आधार पर है। यह डायरी कंपनी का एक कर्मचारी मेंटेन करता था, जिसमें नकदी लेन देन का हिसाब दर्ज किया जाता था। यह डायरी 2011 में बरामद हुई थी। आयकर विभाग ने संदेसरा समूह की कंपनी बायोटेक स्टर्लिंग पर छापा मारा था। उस समय बरामद हुई डायरी में सारे डिटेल दर्ज थे। लेकिन तब कोई कार्रवाई नहीं हुई। उस समय केंद्र में यूपीए की सरकार थी और अहमद पटेल सबसे ताकतवर लोगों में से थे। पर उन्होंने न तो डायरी के सबूत मिटवाए और न उनके आधार पर आयकर आदि में कोई कार्रवाई हुई। 

मोदी सरकार के आने के बाद भी यह मामला थमा रहा। 2016 में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की विजिलेंस टीम ने कार्रवाई शुरू की और आय कर विभाग के अधिकारियों को पकड़ा। फिर विजिलेंस टीम ने सीबीआई और ईडी की जांच के लिए कहा और 2017 के आखिरी दिनों में आ कर सीबीआई ने आय कर विभाग के कुछ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इसके बाद जब जांच आगे बढ़ी तो ईडी के अधिकारी भी इसमें शामिल हुए और उन्होंने छापे में मिले सबूतों के आधार पर सुनील यादव से पूछताछ की, जिसने बयान दे कर अहमद पटेल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम बताए हैं। 

सोच सकते है 2011 की एक डायरी और 2017 में एक गवाह का बयान करा कर डायरी से भ्रष्टाचार का शुरू यह किस्सा। इसीलिए अपना मानना है कि तब 2018 में कई डायरियों में एंट्री का सिलसिला कीचड़ उछाल अभियान की शक्ल पा जाएगा।  

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