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चुनाव आयुक्त ज्योति की वाह!

हरि शंकर व्यास

किसी को भरोसा नहीं हुआ कि जब कैबिनेट के दिग्गजों ने भाजपा को सही बताया तब चुनाव आयुक्त अचलकुमार ज्योति ने वह स्टेंड कैसे लिया जो कायदे का था। यह आश्चर्य इसलिए कि मोदी सरकार ने ज्योति को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया है। उन्होने आईएएस के करियर में आला पद नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते हुए ही पाए। कांडला पोर्ट ट्रस्ट के अध्यक्ष, सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रहते हुए उनका मोदी-अमित शाह से कैसा नाता रहा होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। वे गुजरात के मुख्य सचिव भी रहे है और मोदी सरकार ने ही 2015 में उन्हे तीन सदस्यी चुनाव आयोग में नियुक्त किया था।

इसलिए सोचे कि जब गांधीनगर में भाजपा अडी और दिल्ली के चुनाव आयोग के आगे भाजपा के आला मंत्रियों ने चुनाव आयुक्त ज्योति के आगे दो टूक स्टेंड लिया तो ज्योति ने कैसे वह फैसला लिया होगा जो प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष को नहीं जंचे। 

पर चुनाव आयोग ने दम दिखाया। तभी लोकतंत्र और उसकी संस्थाओं का मजा है। गुलामशाही के वक्त में भी सच्चे मर्द निकल आते है और ऐसा हर समय होता है। इससे चैन नरेंद्र मोदी- अमित शाह ने भी तब पाया था जब दिल्ली में उनको फिक्स करने की सनक थी और अब अहमद पटेल ने पाया है जब उनकी सांस अटकी हुई थी। 

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