Loading... Please wait...

अमित शाह पर एक के बाद एक!

हरि शंकर व्यास

हां, मैं अमित शाह के खिलाफ साजिश, खुराफात के संकेत बूझ रहा हूं। तब वे निपटेगें? तीन मामले  गौरतलब हैं। पहले उनके बेटे जय शाह को ले कर खबर आई। गुजरात में घर-घर जय शाह के धंधे की खबर पहुंची। दूसरा मामला सीबीआई में विशेष निदेशक के पद पर अस्थाना की पदोन्नति का मामला समझ आता है। अस्थाना को अमित शाह का करीबी माना जाता है। उनके पास तमाम संवेदनशील मामलों की जांच है। मगर उनकी पदोन्नति का काम न केवल झमेले वाला बना बल्कि मीडिया में भी लीक हुआ। सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण ने उसे विचारार्थ बनवा दिया तो इसका अर्थ है कि सरकार में ही कोई है जो अमित शाह के दबदबे को खत्म कराना चाहता है। ताजा तीसरा मामला जज लोया की मृत्यु का है। इसकी चर्चा कम हो या ज्यादा, यह महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि महत्वपूर्ण यह रिकार्ड बनना है कि सोहराबुद्दीन-पुलिस की मुठभेड़ के जिस मामले में अमित शाह को अभियुक्त बनाने या न बनाने की सुनवाई में जज लोया को फैसला देना था उस जज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। उसके परिवार वालों ने कैमरे के सामने बाकायदा कहा कि जज लोया को सौ करोड़ रू रिश्वत की पेशकश हुई। 

अमित शाह को ले कर चौथी खटकने वाली बात गुजरात की जमीनी रिपोर्टो में यह सुनाई देना है कि भाजपा कार्यकर्ता नाराज है अमित शाह के अंहकार से। विजय रूपानी को भी मुख्यमंत्री बनने के बाद अमित शाह के घर चक्कर लगाना होता था। कार्यकर्ताओं से सीधे मुंह बात नहीं करते है तो अब भुगते! सचमुच गुजरात के चुनाव में अंहकार मुद्दा है और उसके लिए सिर्फ अमित शाह को जिम्मेवार ठहराने की चर्चा का सीधा अर्थ है कि यदि गड़बड़ हुई तो अमित शाह पर ठिकरा फूटेगा। 

ये तमाम पहलू अलग-अलग कोण से हैं। गुजरात चुनाव से ठीक पहले ऐसा होना संयोग भी हो सकता है। अंग्रेजी के ‘द वायर’ ठिकाने की जयशाह की रिपोर्ट और अंग्रेजी पत्रिका ‘कॉरवां’ में छपी जज लोया की मृत्यु पर सवाल उठाती रपट स्वतंत्र तौर पर अलग-अलग पत्रकारी धर्म की बदौलत है तो ऐसे ही अस्थाना के प्रमोशन में सीबीआई डायरेक्टर के नोट, सीवीसी में विचार का बतंगड़ संयोगों से भी हो सकता है। गुजरात में हार्दिक, अल्पेश आदि यदि अंहकार को चुनावी मुद्दा बना भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं में उदासीनता बनवा रहे हैं तो उसमें जमीनी हकीकत का पुट भी संभव है। मतलब इन सब बातों को अमित शाह के खिलाफ बनी साजिश में गुंथा हुआ न माना जाए। बावजूद इसके यह तथ्य तो बन रहा है कि क्यों अकेले अमित शाह ही सबसे ज्यादा घिरते जा रहे है? गुजरातियों के बीच अमित शाह के अहंकार का मुद्दा बनना चाहिए या वित्त मंत्री अरूण जेतली के हाथों हुई आर्थिक बरबादी पर फोकस होना चाहिए था? 

फिर सवाल यह भी है कि क्यों दिल्ली का वह अंग्रेजीदा सेकुलर मीडिया अमित शाह की खोज खबर ले रहा है जो मई 2014 से पहले भी केवल अमित शाह की काली दाढ़ी से ही इशरतजहां केस मामले में शक की सुई तलाशे हुए था?

ये बहुत गहरी और बारीक बाते हंै! पिछले सौ दिनों में अमित शाह और उनका बेटा गुजरात में घर-घर बदनाम हुआ है तो बिना शोर के भी सोहराबुद्दीन हत्या केस मामले में नए शक चर्चा पा रहे हैं।

जज लोया के परिवारजनों का वीडिया दिमाग भन्ना देने वाला है। परिस्थितिजन्य स्थितियों के हवाले रिटायर चीफ जस्टिस एपी शाह ने जो कहा वह भी  पब्लिक डोमेन में गंभीर रिकार्ड बना है। वह न्यायपालिका और मीडिया के लिए चुनौतीपूर्ण है और सवाल पूछा जा रहा है कि मीडिया में क्यों सन्नाटा पसरा हुआ है!

अपनी थीसिस है वह पसरा रहेगा। हिंदू मानस वाला मीडिया तब भी प्रायोजित था आज भी है। इमरजेंसी में भी मर्द दो –चार बिरले थे और आज भी वही स्थिति है। अमित शाह –नरेंद्र मोदी के मामले में अपनी पहले भी थीसिस थी और आज भी है कि हिंदू होने के चलते यदि इसरतजहां के वक्त में काली-सफेद दाढ़ी में खून के दाग ढूंढ़ना सेकुलरवाद के लिए जरूरी था तो आज भी उस जमात के लिए जज लोया की मौत में खून ढूढ़ना सेकुलवाद की पताका के लिए जरूरी है।  गनीमत है जो कांग्रेस ने इसे मुद्दा नहीं बनाया। राहुल गांधी मूर्खता करेंगे यदि मंदिर जाते-जाते सौहराबुद्दीन की मौत में अमित शाह पर शक की सुई वाली बाते करेंगे। सेकुलरवादी अपना काम करते रहे लेकिन राहुल गांधी हिंदूवादी बनने का परिश्रम यदि करते रहे तो देश की राजनीति का कुल भला होगा। उसे शायद नई दिशा मिलेगी। देश की राजनीति में आज फेंकूविहीन हिंदू पार्टी की भी जरूरत है। 

जो हो, बुनियादी मसला अमित शाह के जीवन-मरण का है। गुजरात में भाजपा की यदि उन्होने छप्पर फाड़ जीत नहीं करवाई तो उनके लिए बहुत मुश्किल होगा। यदि भाजपा हार गई तब तो न जाने ..... उफ, सोचना मुश्किल है।

956 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2016 nayaindia digital pvt.ltd.
Maintained by Netleon Technologies Pvt Ltd