अंधविश्वासों की भी भरमार

भारत में एक किस्म ऐसे लोगों की है जो सारे समय देश के गौरवशाली अतीत के गुणगान में रहते हैं और यह मानते हैं कि भारत के धर्मग्रंथों, परंपराओं और जीवन शैली में सब कुछ पहले से समाहित है। वे यह भी मानते हैं कि भारत की परंपरा, मान्यता आदि को मानने से सब कुछ ठीक हो जाता है। तभी जैसे ही दुनिया के किसी हिस्से में कोई संकट आता है ये लोग उसका समाधान अपने हिसाब से बताने लगते हैं। इस समय कोरोना वायरस का संकट दुनिया भर में फैला है तो उसका भी समाधान अपने हिसाब से बताया जा रहा है।

जैसे पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि गौमूत्र और गाय के गोबर से इसका इलाज है। कई कई जगह लोगों ने गौमूत्र पार्टी का आयोजन कर दिया। इसके वीडियो भी आए। यह भी खबर आई कि पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में गौमूत्र बिकने लगा है और वह भी गाय के दूध से कई गुना ज्यादा कीमत पर। गाय के गोबर की कमी हो गई है और इसकी कालाबाजारी चल रही है क्योंकि यह प्रचार कर दिया गया कि गाय के गोबर को सूखा कर जलाने से कोरोना वायरस मर जाएगा। हालांकि पश्चिम बंगाल में ही भाजपा के कई पढ़े-लिखे नेताओं ने अपने प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर आपत्ति जताई पर उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। देश में एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जो गौमूत्र में दुनिया की हर समस्या और हर बीमारी का समाधान देखता है। सो, वह उसी से कोरोना का इलाज करने लगा।

सोशल मीडिया में ऐसे पोस्ट की भरमार हो गई, जिसमें कहा जा रहा है कि कैसे प्राचीन भारत में शाकाहार पर जोर था, पेड़-पौधों व पशु-पक्षियों का संरक्षण होता था। इस आधार पर यह साबित किया जा रहा है कि कोरोना वायरस मांसाहार से फैला है। एक तरफ ये ही लोग यह फैला रहे हैं कि इसे चीन ने बनाया है। यानी यह कृत्रिम है और चीन ने इसे प्रयोगशाला में बनाया है। दूसरी ओर ये ही लोग चीन के मांसाहार को इस बीमारी के लिए दोष दे रहे हैं। इस प्रचार का नतीजा यह हुआ कि भारत में पॉल्ट्री उद्योग का भट्ठा बैठ गया। इस कारोबार से जुड़े लोगों को हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। जबकि हकीकत यह है कि मांसाहार से इस बीमारी का कोई लेना-देना नहीं है।

ऐसे ही इस बीमारी का समाधान भी भगवान की शरण में खोजा जाने लगा। पूजा-पाठ के सहारे इससे लड़ने का प्रचार हुआ। राम का नाम लेने से बीमारी ठीक हो जाने का दावा किया गया। यह सही है कि भगवान का नाम, पूजा-पाठ आदि अनेक लोगों के मन में साहस और हिम्मत का संचार करते हैं, आस्था और भक्ति से उनको शक्ति मिलती है और इससे कई मुश्किलों का समाधान भी होता है पर न तो इससे कोरोना वायरस का संक्रमण रोका जा सकता है और न इस वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति को इसके जरिए ठीक किया जा सकता है। उसके लिए चिकित्सा जरूरी है। मिथकों और अंधविश्वासों की बजाय वैज्ञानिक तथ्यों को समझने और उस आधार पर बचाव के उपाय करने से ही सुरक्षा संभव है।

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