शत्रु संपत्ति बेचने की तैयारी

भारत सरकार इन दिनों कुछ न कुछ बेचने में लगी हुई है। यह अलग बात है कि कुछ भी बिक नहीं रहा है। सरकार एयर इंडिया बेचना चाहती है पर खरीदार नहीं है। सरकार बीपीसीएल बेचना चाह रही है पर उसके भी खरीदार नहीं आ रहे हैं। तभी खबर है कि सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश के अपने लक्ष्य को आधा कर दिया है। बहरहाल, सरकारी कंपनियों को बेचने के अलावा सरकार स्पेक्ट्रम और खदान वगैरह भी बेचने जा रही है पर उनकी कीमत भी इतनी ज्यादा रखी गई है कि खरीदार कम ही मिल रहे हैं। इन सबके बाद अब सरकार शत्रु संपत्ति बेचने की तैयारी कर रही है। जिस तरह एयर इंडिया को बेचने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी है उसी तरह शत्रु संपत्ति बेचने के लिए भी शाह की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की एक कमेटी बन गई है।

इस कमेटी में शाह के अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी सदस्य हैं। हालांकि सबसे ज्यादा शत्रु संपत्ति उत्तर प्रदेश में है। बहरहाल, कहा जा रहा है कि सरकार पांच हजार से ज्यादा शत्रु संपत्ति को बेच कर एक लाख करोड़ रुपए जुटाएगी। सबसे ज्यादा शत्रु संपत्ति पाकिस्तान के नागरिकों की है और उसके बाद चीन की है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इसे बेच पाती है या नहीं। ध्यान रहे प्रशासन ने भारत के भगोड़े आतंकवादियों और अपराध सरगनाओं की संपत्ति बेचने का प्रयास किया है पर कामयाबी नहीं मिली है। हालांकि शत्रु संपत्ति का मामला अलग है, इसे खरीदने में किसी को कोई खतरा नहीं है पर आज कल रियल इस्टेट की जो हालत है उसे देखते हुए बिक्री की संभावना बहुत उत्साहजनक नहीं दिख रही है और ऊपर से सरकार एक लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य तय कर दिया है।

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