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आय कर विभाग की कमाल की मुस्तैदी!

हरि शंकर व्यास
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले और चुनाव प्रचार के दौरान आय कर विभाग ने जिस अंदाज में काम किया है वह भी मोदी-शाह के सबकुछ झौंकने का प्रमाण है। प्रचार खत्म होने के बाद भी कांग्रेस उम्मीदवार के यहां आय कर विभाग का छापा पड़ा। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया जिस रिसोर्ट में ठहरे वहां भी आय कर विभाग ने छापा मारा और कांग्रेस मंत्री के करीबी उद्योगपतियों के यहां भी छापे मारे गए। 

कर्नाटक में 10 मई को प्रचार बंद हुआ। इसके अगले दिन 11 मई को बीदर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार अशोक खेनी के कार्यालय और घर पर आय कर व राजस्व विभाग के अधिकारियों ने छापा मारा। ध्यान रहे खेनी हाल में कांग्रेस में शामिल हुए थे। वे उद्योगपति हैं और नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज के प्रबंध निदेशक हैं। आठ लोगों की एक टीम ने उनके परिसरों पर छापे मारे। 

इससे पहले सोमवार को आय कर विभाग की टीम ने कृष्णा रिसोर्ट में छापेमारी की। यह बादामी विधानसभा क्षेत्र में है, जहां से मुख्यमंत्री सिद्धरमैया चुनाव लड़ रहे हैं। सिद्धरमैया रविवार को इस रिसोर्ट में ठहरे थे और सोमवार को आय कर विभाग ने इसमें छापा मार कर मुख्यमंत्री के कमरे सहित हर कमरे की तलाशी ली। आय कर विभाग वहां से 20 लाख रुपए जब्त करके ले गई। जिस समय छापा पड़ा उस समय प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सीआर पाटिल और एक एमलसी सीएम इब्राहिम रिसोर्ट में ही थे। 

बादामी के रिसोर्ट में छाप मारने के एक दिन बाद बुधवार को आय कर विभाग ने मेंगलुरू शहर के दो कारोबारियों के यहां छापा मारा। आय कर विभाग के अधिकारियों ने संजीवा पुजारी और सुधाकर शेट्टी के यहां छापा मारा। इन दोनों को राज्य की कांग्रेस सरकार के मंत्री बी रामनाथ राय का करीबी माना जाता है। हालांकि बताया जा रहा है कि इस छापेमारी में भी कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला था। 

इससे भी पहले आय कर विभाग की टीम ने 23 अप्रैल को कर्नाटक और गोवा के एक दर्जन कारोबारियों और उद्योगपतियों के यहां छापे मारे थे। ध्यान रहे कर्नाटक चुनाव की घोषणा से पहले एक अजीबोगरीब आदेश में आय कर विभाग ने राज्य सरकार से ऐसे सारे ठेकेदारों की सूची मांगी थी, जिनको पिछले वित्त वर्ष में 25 लाख रुपए से ऊपर का भुगतान हुआ था। बाद में दर्जनों कारोबारियों के यहां छापे पड़े या तलाशी हुई। इन सबका मकसद यहीं दिख रहा है कि उनको राजनीतिक चंदा देने से रोका जाए। जाहिर है कि राजनीतिक चंदे के जरूरत भाजपा को तो है नहीं क्योंकि उसका खजाना वैसे ही भरा हुआ है। इस लिहाज से कह सकते हैं कि इससे पहले किसी भी चुनाव में आय कर विभाग ने ऐसे व्यवस्थित अंदाज में चुनाव से पहले और चुनाव के बीच छापेमारी नहीं की। 

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में प्रचार बंद होने यानी 10 अप्रैल तक कुल 171 करोड़ रुपए की जब्ती हुई है। इस लिहाज से भी यह दक्षिणी राज्य देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के लगभग बराबर पहुंच गया है। पिछले साल उत्तर प्रदेश के चुनाव में 193 करोड़ रुपए की जब्ती हुई थी। पैसे के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल के लिए बदनाम रहे तमिलनाडु में भी जब्ती करीब डेढ़ सौ करोड़ की रही थी। नकदी और शराब व लोगों में बांटने के लिए खरीद गए उपहारों की जब्ती के लिहाज से उत्तर प्रदेश के बाद कर्नाटक दूसरे स्थान पर रहा। कर्नाटक में 2013 के चुनाव में सिर्फ 13 करोड़ की जब्ती हुई थी। इस बार उससे 12 सौ फीसदी से ज्यादा की जब्ती हुई है। पिछले चार साल में चुनावों में पैसे के बढ़े महत्व को इस आंकड़े से समझा जा सकता है। 

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