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इतिहास में रहेगी यह सनद याद!

कोई माने या न माने अपना मानना है कि इस दशक, इस सदी के अब तक के वर्षों या आजाद भारत के 70 सालों की बड़ी घटना के नाते नोटबंदी इतिहास में अमिट घटना रहेगी। सो गपशप के इस कालम में आज नोटबंदी पर लिखने का मकसद है – ताकि सनद रहे! याद रहे दुनिया के गिने चुने शासकों की तरह भारत के चुने हुए प्रधानमंत्री ने नोटबंदी या नोट बदली की थी और उसी अंजाम को प्राप्त हुए, जिस अंजाम तक बाकी शासक पहुंचे थे। यह बताना भी मकसद है कि लोगों को याद रहे कि किस अंदाज में नोट बंद करने की घोषणा हुई थी, उस पर सवाल उठाने वालों का किस अंदाज में मजाक उड़ाया गया था, फिर नोटबंदी के दो महीनों में किस अंदाज में हर दिन नए नियम घोषित हुए थे और अब क्या कहा जा रहा है! किस तरह से गोलपोस्ट बदले गए और बदले जा रहे है!

आठ नंवबर 2016 को रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल टीवी पर कहा कि आज आधी रात से आपके पास रखे पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट बेकार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि कल से एक महायज्ञ शुरू होगा – काले धन के खिलाफ, भ्रष्टाचार के खिलाफ, आतंकवाद के खिलाफ और नकली नोटों के खिलाफ। प्रधानमंत्री ने देश के लोगों से कहा कि उन्हें 50 दिन दिए जाएं और वे सब कुछ बदल कर रख देंगे। 50 दिन क्या दस महीने बाद जब कुछ नहीं बदला तो केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि लोगों का धन जब्त करना सरकार का मकसद नहीं था। रातों रात सरकार ने गोलपोस्ट बदल दिया। 

नोटबंदी की घोषणा के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी जापान गए थे और 12 नवंबर को उन्होंने वहां से कहा था कि पहले कोई अपना पैसा गंगा जी में नहीं डालता था, आज काला धन रखने वाले पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट गंगाजी में बहा रहे हैं। सरकार इस भरोसे में थी कि कम से कम तीन चार लाख करोड़ रुपए बैंकिंग सिस्टम में नहीं लौटेंगे और सरकार इसे फिर से छाप कर इस्तेमाल करेगी। तभी नोटबंदी के फैसले के दो हफ्ते बाद इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भारत के सबसे बड़े कानूनी अधिकारी अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि चार से पांच लाख करोड़ रुपए का काला धन पकड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि अमान्य किए गए नोटों में से 35 फीसदी नोट नहीं लौटेंगे। यह उन्होंने सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कहा था। 

अब भारतीय रिजर्व बैंक ने बताया है कि सिर्फ एक फीसदी नोट नहीं लौटे हैं। जिस समय नोटबंदी की घोषणा हुई थी, उस समय पांच सौ और एक हजार रुपए के 15 लाख 44 हजार करोड़ रुपए के नोट चलन में थे। आरबीआई ने बताया है कि इसमें से 15 लाख 28 हजार करोड़ रुपए वापस लौट आए हैं। सिर्फ एक फीसदी यानी करीब 16 हजार करोड़ रुपए वापस नहीं लौटे हैं। कहां 35 फीसदी नोट नहीं लौटने का अनुमान और कहां एक फीसदी नोट नहीं लौटने की हकीकत! क्या सरकार का कोई आदमी इस पर माफी मांग रहा है? एक सौ से ज्यादा लोग नोट बदलवाने या बैंक से पैसा निकालने के लिए लगी लाइन में मरे क्या उस पर किसी ने दुख जताया है? पैसे के अभाव में अस्पताल में लोग मरे, शादियां टूटीं, करोडों श्रम दिवस बरबाद हुए क्या इसका किसी को अफसोस है?

बहरहाल, जिस दिन मुकुल रोहतगी ने 35 फीसदी नोट नहीं लौटने का अनुमान जताया था, उसके अगले हफ्ते यानी नोटबंदी के तीन हफ्ते बाद रिजर्व बैंक ने जमा नोटों का ब्योरा दिया और बताया कि 8.45 लाख करोड़ यानी कुल 55 फीसदी नोट वापस लौट गए। सिर्फ तीन हफ्ते में आधे से ज्यादा पैसा लोगों ने बैंकों में जमा कर दिया था। नोटबंदी के 35 दिन बाद जारी हुए रिजर्व बैंक के आंकड़े में बताया गया कि 12.44 लाख करोड़ यानी 80 फीसदी पैसा वापस लौट आया। इसके बाद ही आरबीआई ने आंकड़े जारी करना बंद किया।

इस बीच गोलपोस्ट बदलने की शुरुआत हुई। नोटबंदी के बाद मन की बात कार्यक्रम के पहले प्रसारण में 27 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काले धन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद और नक्सलवाद, नकली नोट आदि की बातें नहीं कीं। सरकार का गोलपोस्ट तब तक बदल चुका था। प्रधानमंत्री का सारा फोकस कैशलेस इकोनॉमी पर था। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि आज देश जो महान लक्ष्य हासिल करना चाहता है वह कैशलेस अर्थव्यवस्था का है। उन्होंने कहा कि सौ फीसदी कैशलेस सोसायटी का लक्ष्य मुश्किल है, लेकिन भारत क्यों नहीं लेसकैश सोसायटी बनाने की शुरुआत कर सकता है?

नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए साल के पहले दिन देश को संबोधित किया। इस बार भी उन्होंने काले धन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, जाली नोट आदि से लड़ाई की बजाय लोगों के साहस और सहयोग की चर्चा की। उन्होंने धन्यवाद दिया और सरकार के इस कदम को ईमानदार बनाम बेईमान और अमीर बनाम गरीब की लड़ाई में बदल दिया। इसके लिए उन्होंने कांग्रेस के दो नेताओं लाल बहादुर शास्त्री और कामराज और दो समाजवादी नेताओं राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण का जिक्र किया। 

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