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मोदी के प्रचार का अब एक पैटर्न !

हरि शंकर व्यास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार और अपने भाषणों की एक थीम बनाई है, जिसे वे हर राज्य में आजमाते हैं। उसी तरह अमित शाह की एक अलग रणनीति है और वे उसे भी अपने अंदाज में हर चुनाव में आजमाते हैं। मोदी ने कर्नाटक चुनाव में भी बिल्कुल उसी अंदाज में रैलियां कीं, भाषण किए और मुद्दे उठाए, जैसे वे गुजरात, उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में करते रहे थे। 

प्रधानमंत्री मोदी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मुकाबले देर से प्रचार शुरू करते हैं। वे बिल्कुल आखिरी चरण में प्रचार के लिए उतरते हैं और अपनी रैलियों से कारपेट बांबिंग कर देते हैं। कर्नाटक में भी वे एक मई को प्रचार में उतरे, जबकि उससे एक महीना पहले से प्रचार चल रहा था। प्रचार में उतरने के दस दिन में उन्होंने 21 रैलियां कीं और पांच दिन नमो एप के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने अपने भाषण और रैलियों से सारा विमर्श बदल दिया, जो मुख्यमंत्री सिद्धमैया ने तय किया था। 

सिद्धरमैया ने कन्नड़ अस्मिता का कार्ड खेला था उसी पर मोदी भी आगे बढ़े। वे दूसरे राज्यों में भी स्थानीय नायकों का जिक्र करते रहे हैं और उनके बहाने कांग्रेस को घेरते हैं। उन्होंने कर्नाटक में भी कन्नड़ गर्व का प्रतीक रहे जनरल थिमैया का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि नेहरू और मेनन ने उनका अपमान किया था। हालांकि बाद में तथ्यों को पेश करके लोगों ने बताया कि ऐसा कतई नहीं हुआ था। लेकिन मोदी अपना मैसेज देने में कामयाब रहे थे। 

ध्यान रहे बिल्कुल इसी अंदाज में मोदी ने गुजरात में प्रचार के दौरान कहा था कि कांग्रेस और नेहरू ने सरदार पटेल का अपमान किया था। उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रचार में कहा कि नेहरू और कांग्रेस ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का अपमान किया। बिहार में उन्होंने जयप्रकाश नारायण के अपमान का मुद्दा उठाया था। इसी तरह उन्होंने पश्चिम बंगाल के प्रचार में आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने सुभाषचंद्र बोस का अपमान किया। इसी अंदाज में कर्नाटक में जनरल थिमैया और जनरल करियप्पा के अपमान का मुद्दा उन्होंने उठाया। 

इतना ही नहीं टीपू सुल्तान की जयंती मनाने का विरोध करते हुए प्रधानंमत्री मोदी ने चित्रदुर्ग में प्रचार करते हुए एक स्थानीय महिला ओनाके ओबावा का जिक्र किया। इस बहादुर महिला ने टीपू सुल्तान के पिता हैदर अली के खिलाफ चित्रदुर्ग के राजा की ओर से लड़ाई की थी। मोदी ने कहा कि ऐसी बहादुर महिला का सम्मान करने की बजाय कांग्रेस सुल्तानों की जयंतियां मना रही है। ध्यान रहे मोदी इस तरह के स्थानीय प्रतीक हर चुनाव में हर राज्य में उठाते रहे हैं। 

उनके प्रचार की एक और खास बात यह है कि वे चार साल केंद्र की सरकार में रहने और 20 राज्यों में भाजपा की सरकार बनने के बाद भी विपक्ष के अंदाज में भाषण देते हैं। वे अपनी उपलब्धियां बताने से ज्यादा कांग्रेस की कमियां गिनाते हैं। पंडित नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक कांग्रेस के प्रथम परिवार के हर सदस्य पर निशान साधते हैं। असल में इस देश में एक बड़ा वर्ग है, जो अलग अलग कारणों से कांग्रेस को नापसंद करता है। मोदी उस वर्ग का हर वोट हासिल करने के लिए कांग्रेस को निशाने पर रखते हैं। कांग्रेस पर हमला करते हुए जान बूझकर तथ्यों की भी अनदेखी करते हैं या गलत तथ्य का उद्धरण देते हैं ताकि कांग्रेस के खिलाफ हमले को ज्यादा आक्रामक बनाया जा सके।

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