लोक लुभावन घोषणाओं की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंटरव्यू में एक बहुत अहम बात कही। उन्होंने कहा कि किसानों की कर्ज माफी की घोषणा राजनीतिक स्टंट है। यह अलग बात है कि कुछ समय पहले तक खुद मोदी यह स्टंट करते रहे थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार में वादा किया था कि भाजपा की सरकार बनी तो कैबिनेट की पहली बैठक में कर्ज माफी का फैसला होगा। जब भाजपा जीत गई और कई दिन की जद्दोजहद के बाद योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बन गए तो कई दिनों तक उनक कैबिनेट की बैठक नहीं हुई। जब तक कर्ज माफी का प्रस्ताव तैयार नहीं हो गया तब तक कैबिनेट नहीं बैठी। मोदी का वादा पूरा करने के लिए पहली कैबिनेट में कर्ज माफी का ऐलान किया गया। राज्य सरकार ने 36 हजार करोड़ रुपए की कर्ज माफी की। महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने भी 34 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया। 

पर अब प्रधानमंत्री को लग रहा है कि यह राजनीतिक स्टंट है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कर्ज माफी के दांव से राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा को हरा दिया। इन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनते ही कर्ज माफी की घोषणा कर दी गई है। राहुल ने यह भी कह दिया कि जब तक देश भर के किसानों का कर्ज माफ नहीं होता है तब तक वे मोदी को चैन से नहीं सोने देंगे। उन्होंने आगे कहा कि अगर मोदी की सरकार कर्ज माफी नहीं करती है तो केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने पर वे किसानों का कर्ज माफ करेंगे। 

तभी ऐसा लग रहा है कि मोदी कर्ज माफी से आगे की सोच रहे हैं। उन्होंने अपने इंटरव्यू में इसका एक संकेत देते हुए कहा कि कर्ज माफी का फायदा बहुत कम किसानों को मिल पाता है। ज्यादा किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार सीधे खाते में नकद पैसा डालने के बारे में सोच सकती है। बताया जा रहा है कि इस योजना की रूपरेखा बन रही है। पिछले दिनों झारखंड की भाजपा सरकार ने किसानों के प्रति एकड़ पांच हजार रुपए सब्सिडी देने का ऐलान किया। इसके लिए करीब ढाई हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया। तेलंगाना में चंद्रशेखर राव की सरकार पहले से किसानों को छह हजार रुपए प्रति एकड़ सब्सिडी देती है। 

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी कुछ ऐसी बातें कही हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि सरकार गरीबी दूर करने के नाम पर नकदी बांटने की सोच रही है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक का आरक्षित नकद सरकार वित्तीय घाटा कम करने के लिए नहीं चाहिए, बल्कि गरीबी दूर करने के लिए चाहिए। ध्यान रहे सरकार का वित्तीय घाटा पहले ही तय लक्ष्य से ऊपर चला गया है और अगर सरकार ने अभी खैरात बांटी तो घाटा और बढ़ेगा। तभी सरकार के खजाने में हाथ लगाए बगैर रिजर्व बैंक के आरक्षित नकद में से तीन-सवा तीन लाख करोड़ रुपया लेकर उसे बांट देने का फैसला हो सकता है। 

सरकार ने उज्ज्वला योजना के दायरे का विस्तार किया है और देश के करीब 90 फीसदी लोगों को इसकी कवरेज में ला दिया है। स्वास्थ्य सेवा का लाभ भी ज्यादा से ज्यादा लोगों को देने का प्रयास हो रहा है। ऊपर से किसानों और गरीबों के खाते में सीधे नकदी ट्रांसफर की घोषणा भी हो सकती है। इसके अलावा किसानों के लिए एक लाख रुपए तक बिना ब्याज के कर्ज देने की भी योजना की चर्चा है। इस तरह की कई लोक लुभावन घोषणाओं की तैयारी हो रही है। अगले दो महीने इसी में जाने हैं। प्रधानमंत्री मोदी की एक सौ सभाएं होनी हैं और ढेर सारी लोक लुभावन घोषणाएं होनी हैं। 

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